Jammu and Kashmir: जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 हटाने पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बेसब्री से है इंतजार
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने पर हर कोई सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, वहीं राजनीतिक नेताओं ने फैसले पर अलग-अलग राय व्यक्त करना शुरू कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों और केंद्र सरकार की दलीलें सुनीं.
श्रीनगर, 10 दिसंबर : जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने पर हर कोई सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, वहीं राजनीतिक नेताओं ने फैसले पर अलग-अलग राय व्यक्त करना शुरू कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षों और केंद्र सरकार की दलीलें सुनीं. शीर्ष अदालत सोमवार को फैसला सुनाएगी. जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं ने संभावित निर्णय पर अलग-अलग विचार व्यक्त किए हैं. भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रविंदर रैना ने कहा है कि इस बहुचर्चित मुद्दे पर सभी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि यह निर्णय 'लोगों और देश के हितों के पक्ष में' होने की संभावना नहीं है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी निश्चित तौर पर यह नहीं कह सकता कि अदालत का फैसला क्या होगा. उन्होंने कहा, "हम इंतजार करेंगे और फिर तय करेंगे कि हमारी भविष्य की कार्रवाई क्या होनी चाहिए." पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला जम्मू-कश्मीर के लोगों के पक्ष में होगा. अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुजफ्फर शाह ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला देश के संविधान की परीक्षा होगा. शाह ने एक कदम आगे बढ़कर कहा कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के लिए भी एक परीक्षा होगा. यह भी पढ़ें : मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर दो वाहनों की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत, सात घायल
जम्मू-कश्मीर में आम आदमी कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है कि क्या धारा 370 और 35ए हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी या फिर इन्हें कुछ हद तक बहाल किया जाएगा. “अदालत जो फैसला करेगी वह सभी को स्वीकार करना होगा. इस फैसले की कानूनी और संवैधानिक दोनों तरह की वैधता है." “जो लोग कह रहे हैं कि फैसले के बारे में जानने के बाद वे भविष्य का फैसला करेंगे, वे दिवास्वप्न देख रहे हैं." “यह पांच न्यायाधीशों की एक संवैधानिक पीठ है और देश के संविधान के बारे में उनसे अधिक जानकार कोई नहीं है. कभी कश्मीर में अलगाववादी भावना का केंद्र माने जाने वाले श्रीनगर शहर के निवासी 56 वर्षीय जलाल-उद-दीन ने कहा, "हर किसी को, चाहे मुस्कुराहट के साथ या नाराजगी के साथ, निर्णय को स्वीकार करना होगा."
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 10, 2023 01:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

