Punjab Twin Blast: पंजाब धमाकों के पीछे ISI का हाथ, अमृतसर और जालंधर विस्फोटों में एनआईए का बड़ा खुलासा; 'ऑपरेशन सिंदूर' की बरसी पर रची गई थी साजिश

नई दिल्ली, 6 मई: पंजाब के अमृतसर और जालंधर (Amritsar and Jalandhar) में हाल ही में हुए विस्फोटों की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) (NIA) के अनुसार, इन धमाकों के पीछे सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ है. शुरुआती जांच में पता चला है कि ये धमाके पाकिस्तान (Pakistan) में बैठे ISI समर्थित हैंडलर्स के निर्देशों पर किए गए थे. इन विस्फोटों की टाइमिंग को लेकर सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से सतर्क हैं, क्योंकि इन्हें 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) की बरसी से ठीक कुछ दिन पहले अंजाम दिया गया था. यह भी पढ़ें: Twin Blast In Punjab: पंजाब में एक के बाद एक दो धमाके, अमृतसर सैन्य क्षेत्र और जालंधर में BSF मुख्यालय के पास ब्लास्ट से हड़कंप, हाई अलर्ट पर एजेंसियां; VIDEOS

'ऑपरेशन सिंदूर' और धमाकों का कनेक्शन

जांचकर्ताओं का मानना है कि इन धमाकों का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती देना था. 'ऑपरेशन सिंदूर' भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 7 मई को पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए चलाया गया था, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में आतंकी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया गया था. एनआईए को संदेह है कि पंजाब में ये विस्फोट यह संदेश देने के लिए किए गए थे कि पाकिस्तान अभी भी भारत पर हमला करने की क्षमता रखता है.

स्थानीय युवाओं को बरगलाने की साजिश

जांच में यह भी सामने आया है कि ISI पंजाब में खालिस्तान आंदोलन को पुनर्जीवित करने के लिए बेताब है. एक अधिकारी के अनुसार, ISI ऐसे स्थानीय युवाओं की तलाश कर रही है जिनका झुकाव कट्टरपंथ की ओर है. योजना यह है कि इन युवाओं के जरिए राज्य भर में नियमित अंतराल पर कम तीव्रता वाले (Low-Intensity) धमाके कराए जाएं ताकि लोगों के मन में डर पैदा किया जा सके.  पंजाब पुलिस और एनआईए की राडार पर इस समय कई संदिग्ध युवा हैं.

ISI की नई रणनीति: छोटे हमले और 'कूलिंग पीरियड'

सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय स्थानीय सेल (local cells) का निर्माण है. ये स्थानीय लोग अपराध की दुनिया में नए होते हैं, इसलिए पुलिस की इन पर नजर कम रहती है. ISI की रणनीति के तहत, ये हमलावर एक बार हमला करने के बाद भूमिगत (Underground) हो जाते हैं और 'कूलिंग पीरियड' खत्म होने के बाद ही उन्हें अगला काम सौंपा जाता है. बताया जा रहा है कि ISI ने पंजाब भर में ऐसे कम से कम 100 युवाओं को भर्ती करने का लक्ष्य रखा है.

कम तीव्रता वाले धमाकों के पीछे का तर्क

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर हमला करने के बजाय कम तीव्रता वाले विस्फोट करना एक सोची-समझी रणनीति है। बड़े हमलों के लिए अधिक गोला-बारूद और समय की आवश्यकता होती है, जिससे सूचना लीक होने और पकड़े जाने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं, छोटे हमलों की तैयारी आसान होती है और इनका पता लगाना चुनौतीपूर्ण होता है. हाल ही में पटियाला पुलिस ने रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की एक ऐसी ही साजिश को नाकाम कर चार लोगों को गिरफ्तार किया था.

एनआईए अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे के बड़े लिंक तलाश रही है. यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में खालिस्तानी गतिविधियों को हवा देने की कोशिशें पिछले कुछ समय में काफी बढ़ गई हैं.