World Consumer Rights Day 2021: विश्‍व उपभोक्‍ता अधिकार दिवस आज, जानिए आपके पास कौन-कौन से हैं अधिकार

विश्‍व उपभोक्‍ता अधिकार दिवस हर साल 15 मार्च को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य उपभोक्ता को उसके अधिकारों और ज़िम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है. भारत में 24 दिसंबर को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू हुआ था.

प्रतीकात्मक तस्वीर (File Photo)

World Consumer Rights Day 2021: विश्‍व उपभोक्‍ता अधिकार दिवस हर साल 15 मार्च को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य उपभोक्ता को उसके अधिकारों और ज़िम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है. भारत में 24 दिसंबर को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 लागू हुआ था. इस अधिनियम का उद्देश्य खराब सामान, त्रुटिपूर्ण सेवाओं और अनुचित व्यापार परिपाटियां जैसे विभिन्न प्रकार के शोषण से उपभोक्ताओं को सुरक्षा प्रदान करना है. उपभोक्ता सेवाओं में लापरवाही पर तय होगी प्रबन्‍ध निदेशक की जवाबदेही: ऊर्जा मंत्री

केंद्र सरकार उपभोक्‍ताओं को डिजिटाईजेशन के पूर्ण लाभ उपलब्‍ध कराने और ऑनलाइन व्‍यवस्‍था से जुड़े जोखिमों के विरूद्ध सुरक्षोपाय करने के लिए पहले से ही सही दिशा में लगातार काम कर रही है. यह प्रौद्योगिकी का युग है और इस डिजिटल युग में उपभोक्‍ताओं को शिक्षित करना और उनके विवादों का निपटान करना सरकार के लिए एक चुनौती है. भारत में उपभोक्‍ता अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करवा सकते है और उनका निपटान भी शीघ्रता से किया जाता है.

भारत में उपभोक्ता का अधिकार-

नए नियम के तहत, उपभोक्ता अब किसी भी आयोग में शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इससे पहले, मामला केवल वहीं दर्ज होता था जहां माल निर्माण करने वाली कंपनी का कार्यालय मौजूद होता था.

अब भ्रामक विज्ञापनों के लिए मशहूर हस्तियों को भी सजा और जुर्माना हो सकता है. नए कानून में इसका प्रावधान भी है. ऐसे में अब सेलिब्रिटीज भी बहुत सोच समझकर विज्ञापन चुन रहे हैं.

नए कानून में ई-कॉमर्स कंपनियों को भी शामिल किया गया है. ऐसे में अब ऑनलाइन खरीददार को उत्पाद या सेवा के लिए कस्टमर केयर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है, वे अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं.

अब विक्रेता भी इस कानून के दायरे में है. यदि कोई दुकानदार निर्धारित एमआरपी से अधिक पर सामान बेच रहा है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

खाद्य पदार्थ में मिलावट करने पर गंभीर नतीजे भगतने पद सकते है. खाने-पीने की चीजों में मिलावट के लिए कंपनियों के खिलाफ जेल और जुर्माने का प्रावधान है. मिलावट के मामले में 6 महीने की सजा, जबकि मिलावट के कारण ग्राहक की मौत पर उम्रकैद की सजा हो सकती है.

पहले जिला स्तर पर 20 लाख रुपये तक, राज्य स्तर पर 1 करोड़ रुपये, जबकि इस राशि से अधिक की शिकायतें राष्ट्रीय स्तर पर सुनी जा सकती थीं. अब जिला आयोग 1 करोड़ रुपये तक, राज्य आयोग 10 करोड़ रुपये तक और इससे उच्च मूल्य के मामलों की शिकायत राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता द्वारा की जा सकती है.

अगर किसी कंपनी के उत्पाद के खिलाफ अलग-अलग मामले कई जगहों पर हैं, तो बड़ी कंपनियों को भारत में भी कड़े एक्शन (Class Action Suits) का सामना करना पड़ सकता है.

ग्राहक मध्यस्थता सेल का गठन किया गया है, अब दोनों पक्ष आपसी सहमति से मध्यस्थता का विकल्प भी चुन सकते हैं.

इसके तहत उत्पाद या सेवा के बारे में उपभोक्ता जानकारी प्राप्त कर सकता है. यानी की खरीददार वस्तु की मात्रा, क्षमता, गुणवत्ता, शुद्धता, स्तर और कीमत के बारे में हर जानकारी पा सकता है.

कंपनी को ग्राहक की किसी भी समस्या या असुविधा का निवारण करना अनिवार्य कर दिया गया है.

ग्राहक को खरीदारी करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. जब तक ग्राहक आश्वस्त नहीं होता और वस्तु की जांच नहीं करता, तब तक उसे जबरन खरीदने के लिए नहीं कहा जा सकता है.

उल्लेखनीय है कि विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2021 का थीम सभी उपभोक्ताओं को "प्लास्टिक प्रदूषण" से लड़ने के लिए इकट्ठा करना है. जबकि विश्‍व उपभोक्‍ता अधिकार दिवस, 2019 “ट्रस्टेड स्मार्ट प्रोडक्ट” की थीम पर मनाया गया था.

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