‘नोबेल सम्मान न रद्द होगा, न ट्रांसफर’: Maria Corina Machado ने Donald Trump को सौंपा अपना शांति पदक; नोबेल समिति ने नियमों पर दी सफाई
डोनाल्ड ट्रंप और मारिया कोरिना मचाडो (Photo Credits: X/@WhiteHouse)

वाशिंगटन: वेनेजुएला की लोकतंत्र समर्थक नेता (Venezuelan Opposition Leader) मारिया कोरिना मचाडो (María Corina Machado) ने एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाले घटनाक्रम में अपना 'नोबेल शांति पुरस्कार 2025' का पदक (Nobel Peace Prize Medal) अमेरिकी राष्ट्रपति (U.S. President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को भेंट कर दिया है. गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मचाडो ने यह पदक ट्रंप को सौंपा. मचाडो का कहना है कि यह वेनेजुएला की आजादी और निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने में अमेरिकी प्रशासन की भूमिका के प्रति आभार प्रकट करने का एक प्रतीकात्मक तरीका है.

हालांकि, इस उपहार के बाद नॉर्वेजियन नोबेल समिति (Norwegian Nobel Committee) ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी कर दुनिया को नोबेल पुरस्कारों के सख्त नियमों की याद दिलाई है. यह भी पढ़ें: US Imposes 25% Tariffs on Iran Trade: ईरान से व्यापार पर अमेरिका लगाएगा 25 फीसदी टैरिफ, जानें भारत पर क्या पड़ेगा असर?

नोबेल समिति का रुख: खिताब 'ट्रांसफर' नहीं हो सकता

नोबेल समिति ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि नोबेल पुरस्कार के नियम अत्यंत स्पष्ट हैं और इनमें किसी भी बदलाव की गुंजाइश नहीं है.

  • अपरिवर्तनीय सम्मान: समिति ने कहा, ‘एक बार नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो जाने के बाद, इसे न तो रद्द किया जा सकता है, न साझा किया जा सकता है और न ही किसी दूसरे को स्थानांतरित (Transfer) किया जा सकता है.’
  • व्यक्तिगत उपलब्धि: 'नोबेल विजेता' (Laureate) का दर्जा एक व्यक्तिगत सम्मान है जो प्राप्तकर्ता के विशिष्ट कार्यों के लिए दिया जाता है. यह कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे कानूनी रूप से किसी और को सौंपा जा सके.
  • पदक बनाम खिताब: समिति ने स्पष्ट किया कि यद्यपि एक विजेता अपना 18-कैरेट का स्वर्ण पदक किसी को उपहार में दे सकता है या बेच सकता है, लेकिन इससे पदक प्राप्त करने वाला व्यक्ति आधिकारिक तौर पर 'नोबेल विजेता' नहीं बन जाता.

व्हाइट हाउस में 'प्रतीकात्मक' भेंट

मचाडो ने ट्रंप को पदक सौंपते हुए इसकी तुलना 200 साल पुराने एक ऐतिहासिक क्षण से की. उन्होंने बताया कि कैसे जनरल लाफायेट ने साइमन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला पदक दिया था. मचाडो ने ट्रंप को ‘वाशिंगटन का उत्तराधिकारी’ बताते हुए कहा कि यह पदक वेनेजुएला के उन लोगों की ओर से है जो आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस उपहार को ‘आपसी सम्मान का अद्भुत संकेत’ बताते हुए सोशल मीडिया पर मचाडो का आभार व्यक्त किया. बता दें कि ट्रंप लंबे समय से खुद नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की इच्छा व्यक्त करते रहे हैं. यह भी पढ़ें: US H-1B Visa Fee Hike: अमेरिका ने बढ़ाई H-1B वीजा प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस; जानें नए रेट्स और कब से लागू होंगे नियम

नोबेल समिति ने दोहराया कि पुरस्कार रद्द या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता 

वेनेजुएला की राजनीति और ट्रंप का रुख

यह भेंट ऐसे समय में हुई है जब वेनेजुएला एक बड़े राजनीतिक बदलाव से गुजर रहा है. अमेरिकी सेना द्वारा निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद मचाडो वाशिंगटन से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही हैं.

  • ट्रंप की हिचकिचाहट: हालांकि ट्रंप ने पदक स्वीकार कर लिया है, लेकिन उन्होंने अभी तक मचाडो को वेनेजुएला के अगले नेता के रूप में पूरी तरह समर्थन नहीं दिया है.
  • बदलते समीकरण: ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वे स्थिरता बनाए रखने के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज (Delcy Rodríguez) के साथ भी काम करने को तैयार हैं.

2025 के पुरस्कार का संदर्भ

मारिया कोरिना मचाडो को अक्टूबर 2025 में वेनेजुएला में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए उनके निरंतर संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वह पिछले महीने ही ओस्लो में अपना पुरस्कार लेने पहुंची थीं, जिसके बाद वह अमेरिका की यात्रा पर हैं. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप इस पदक को व्हाइट हाउस के संग्रहालय में रखेंगे या अपने निजी संग्रह में.