केंद्र सरकार ने चीनी मिलों और डिस्टिलरी को एक बड़ी खुशखबरी दी है. सरकार ने 2025-26 के लिए गन्ने के रस और शीरे से इथेनॉल बनाने पर लगी ऊपरी सीमा (कैप) को हटा दिया है. इसका सीधा मतलब है कि अब मिलें अपनी क्षमता के अनुसार जितना चाहें उतना इथेनॉल बना सकती हैं.
क्या है पूरा मामला?
सरकार ने सोमवार को एक नोटिफिकेशन जारी करके यह जानकारी दी. इसके मुताबिक, इथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY) 2025-26, जो नवंबर 2025 से शुरू होगा, में चीनी मिलें और डिस्टिलरी बिना किसी रोक-टोक के गन्ने के रस, शुगर सिरप और दोनों तरह के शीरे (B-हैवी और C-हैवी) से इथेनॉल का उत्पादन कर सकेंगी.
आपको बता दें कि मौजूदा साल 2024-25 के लिए सरकार ने 40 लाख टन चीनी को इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत दी थी. लेकिन अब अगले साल के लिए यह लिमिट खत्म कर दी गई है.
सरकार ऐसा क्यों कर रही है?
सरकार 'इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP)' प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लगातार बढ़ावा दे रही है. इथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जो गन्ने से बनता है. इसे पेट्रोल में मिलाने से कई फायदे होते हैं:
- प्रदूषण कम होता है: यह पेट्रोल के मुकाबले साफ ईंधन है.
- विदेशी मुद्रा बचती है: हमें विदेश से कम कच्चा तेल खरीदना पड़ता है.
- किसानों को फायदा होता है: गन्ना किसानों को उनकी फसल का अच्छा दाम मिलता है.
सरकार का लक्ष्य 2025-26 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का है. अच्छी बात यह है कि हम इस लक्ष्य के बहुत करीब हैं. 31 जुलाई, 2025 तक पेट्रोल में औसतन 19.05% इथेनॉल मिलाया जा चुका है.
चीनी की कीमतों का क्या होगा?
सरकार ने यह भी साफ किया है कि वो देश में चीनी की सप्लाई पर पूरी नजर रखेगी. खाद्य मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय समय-समय पर समीक्षा करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इथेनॉल उत्पादन के कारण घरेलू बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतें नियंत्रण में रहें.













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