BMC Elections 2026: महाराष्ट्र की राजनीति इस समय उफान पर है. ब्रिहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) चुनाव को लेकर भाजपा–शिंदे गुट और ठाकरे बंधुओं के बीच टक्कर तेज हो चुकी है. एशिया की सबसे अमीर नगर निगम के लिए होने वाले इस चुनाव में 15 जनवरी 2026 को मतदान होगा, जबकि 16 जनवरी को मतगणना की जाएगी. 227 वार्ड, करीब 74 हजार करोड़ रुपये का बजट और 114 सीटों का बहुमत आंकड़ा यही मुंबई के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा. सूत्रों के अनुसार, भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला अंतिम रूप से तय हो चुका है। लेकिन इस गठबंधन में अजित पवार की एनसीपी को जगह नहीं मिली है, जिससे महायुति का समीकरण जटिल हो गया है. एशिया की सबसे अमीर नगर निगम पर निर्णायक जंग, महायुति बनाम ठाकरे गठबंधन किसके सिर सजेगा मुंबई का ताज?
महायुति में सीट बंटवारा: भाजपा 140, शिंदे शिवसेना 87 – अब भी असमंजस
महायुति के दोनों प्रमुख दलों ने आखिरी दिनों में सीट बंटवारे पर बड़ी सहमति बनाई है. मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने बताया कि बीएमसी चुनाव में भाजपा 128–140 सीटों पर और शिंदे गुट की शिवसेना 79–87 वार्डों पर चुनाव लड़ेगी. इसका मतलब है कि कुल 207 से अधिक सीटों पर दोनों दलों में सहमति बन चुकी है, लेकिन शेष 20 सीटों पर अब भी पेंच फंसा हुआ है.
अमित साटम के अनुसार, “सीट बंटवारे पर बातचीत हो चुकी है. भाजपा और शिवसेना के बीच कुल 207 सीटों पर सहमति बन गई है. बाकी 20 सीटों पर अभी चर्चा जारी है और वरिष्ठ स्तर पर बातचीत के बाद जल्द ही समाधान निकाला जाएगा.”
इस लंबी प्रक्रिया ने महायुति के भीतर के तनाव को भी उजागर किया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच कई अहम बैठकें हुई हैं. शुरुआत में शिंदे गुट ने 100–125 सीटों की मांग रखी थी, जबकि भाजपा ने कम सीटों का प्रस्ताव दिया. अब 79–90 सीटों के फार्मूले पर बात आगे बढ़ी है.
अजित पवार गुट अकेले लड़ेगा, उम्मीदवारों की सूची जारी
महायुति के तीसरे घटक ने बड़ा फैसला लेते हुए बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान किया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. जहां एक ओर भाजपा और शिंदे शिवसेना साथ आ चुकी हैं, वहीं अजित पवार गुट ने अलग राह चुनी है. पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी गई है. नवाब मलिक के नेतृत्व में एनसीपी (अजित पवार) बीएमसी में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है. यह फैसला साफ दिखाता है कि महायुति के भीतर तीनों दल अपने-अपने हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
ठाकरे बंधुओं की ऐतिहासिक जुगलबंदी: उद्धव–राज की राजनीतिक वापसी
मुंबई की राजनीति में एक दशक बाद ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने गठबंधन कर लिया है. करीब 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक ही राजनीतिक मंच पर आए हैं. इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा 23 दिसंबर 2025 को हुई. इसका मुख्य आधार “मराठी मानुस” और “मराठी अस्मिता” का मुद्दा है, जो कभी शिवसेना की सबसे बड़ी ताकत रहा है.
सीट बंटवारे का संभावित फार्मूला इस प्रकार है:
शिवसेना (यूबीटी): 145–150 सीटें
मनसे: 65–70 सीटें
एनसीपी (शरद पवार गुट): 10–12 सीटें (यदि औपचारिक गठबंधन होता है)
इस समझौते के तहत शिवसेना ने कुछ मौजूदा पार्षदों की सीटें मनसे के लिए छोड़ी हैं. ऐसे कई पार्षदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जाने की संभावना जताई जा रही है. बीएमसी में ऐतिहासिक रूप से मजबूत रही शिवसेना (यूबीटी) इस गठबंधन का नेतृत्व कर रही है. 2017 में अविभाजित शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं, जो अब विभाजन के बाद बंट चुकी हैं.
कांग्रेस अलग-थलग, महाविकास अघाड़ी बिखरी
बीएमसी चुनाव में विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) टूट चुकी है. कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इसका सीधा असर मुस्लिम, अल्पसंख्यक और पारंपरिक शहरी वोटों पर पड़ेगा, जो अब अलग-अलग दलों में बंट सकते हैं. कांग्रेस का मानना है कि 2024 के विधानसभा चुनाव और हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर वह अकेले बेहतर नतीजे ला सकती है. कांग्रेस का आधार मुस्लिम, दलित और उत्तर भारतीय समुदायों में माना जाता है, जो मनसे के पारंपरिक विरोधी रहे हैं.
शरद पवार गुट की दुविधा, फैसला बाकी
एनसीपी (शरद पवार गुट) फिलहाल निर्णायक स्थिति में नहीं है. 23 दिसंबर 2025 को शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटील और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच करीब दो घंटे तक सीट बंटवारे पर चर्चा हुई, लेकिन अब तक कोई औपचारिक फैसला नहीं हो पाया है. यह साफ नहीं है कि शरद पवार गुट ठाकरे–मनसे गठबंधन में शामिल होगा या अलग राह अपनाएगा. यदि वह इस गठबंधन का हिस्सा बनता है, तो विपक्षी मोर्चा और मजबूत हो सकता है.
तीन ताकतें, तीन रणनीतियां: त्रिकोणीय मुकाबला
मुंबई महापालिका चुनाव में तीन बड़े राजनीतिक समूह आमने-सामने हैं:
- महायुति (भाजपा–शिंदे शिवसेना–एनसीपी): सत्तारूढ़ गठबंधन सभी 227 सीटों पर मजबूत उपस्थिति के साथ मैदान में है. सरकारी संसाधन, विकास कार्यों का नैरेटिव और मजबूत संगठनात्मक ढांचा इसे बढ़त दिला सकता है.
- उद्धव–राज गठबंधन: मराठी अस्मिता, भावनात्मक अपील और पारंपरिक शिवसेना समर्थकों के सहारे यह गठबंधन खासतौर पर मराठी बहुल वार्डों में मजबूत चुनौती पेश कर रहा है.
- कांग्रेस (अकेले): शहरी, मुस्लिम, दलित और अल्पसंख्यक वोटरों पर फोकस के साथ कांग्रेस स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है, हालांकि बीएमसी में उसका संगठनात्मक आधार सीमित माना जाता है.
आखिरकार, मुंबई का राजनीतिक भविष्य 15 जनवरी 2026 के मतदान और 16 जनवरी की मतगणना पर निर्भर करेगा. स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की लोकप्रियता, समुदायों की भावनाएं और बूथ स्तर की रणनीति यही सब तय करेगा कि एशिया की सबसे अमीर नगर निगम की सत्ता किसके हाथ जाएगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसका असर न सिर्फ मुंबई, बल्कि पूरे महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा.













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