BMC Elections 2026: एशिया की सबसे अमीर नगर निगम पर निर्णायक जंग, महायुति बनाम ठाकरे गठबंधन किसके सिर सजेगा मुंबई का ताज?
बीएमसी जैसे बड़े महानगर में स्थानीय उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि, मैदान स्तर पर संगठन, मतदान प्रतिशत और आखिरी दिनों की हवा कई बार सर्वे अनुमानों को पलट चुके हैं. इसलिए कहा जा सकता है कि रुझान भले ही महायुति के पक्ष में हों, लेकिन अंतिम फैसला 15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को होने वाली मतगणना ही तय करेगी कि मुंबई की सत्ता पर किसका परचम लहराएगा.
BMC Elections 2026: ब्रिहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) चुनाव 2026 को महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे अहम स्थानीय मुकाबला माना जा रहा है. एशिया की सबसे अमीर नगर निगम होने के कारण बीएमसी पर कब्जा सिर्फ स्थानीय सत्ता नहीं, बल्कि मुंबई के राजनीतिक नैरेटिव पर नियंत्रण भी तय करता है. लगभग 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट, 227 वार्डों और 114 के बहुमत आंकड़े के साथ यह चुनाव सभी बड़े दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है. मौजूदा राजनीतिक समीकरण, सर्वे रुझान और हालिया चुनाव परिणामों को मिलाकर देखें तो फिलहाल तस्वीर यही है कि बीएमसी चुनाव 2026 में बढ़त महायुति गठबंधन के पक्ष में दिख रही है और उसके बहुमत का आंकड़ा छूने या उससे थोड़ा ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है. वहीं, उद्धव–राज गठबंधन के मजबूत और आक्रामक विपक्ष के रूप में उभरने के संकेत हैं, जो मराठी बहुल इलाकों में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है, जबकि कांग्रेस सीमित सीटों के साथ संभावित 'स्पॉइलर' की भूमिका में दिखती है. राजनीतिक उथल-पुथल का साल, वक्फ से लेकर वंदे मातरम तक उठे सवाल, जानिए किस मुद्दे की रही सबसे ज्यादा चर्चा
महायुति बनाम ठाकरे गठबंधन: राजनीतिक समीकरण
सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और सहयोगी एनसीपी गुट ने लंबी खींचतान के बाद बीएमसी चुनाव के लिए सीट बंटवारा तय किया है. रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा करीब 140 वार्डों पर उम्मीदवार उतार रही है, जबकि शिंदे शिवसेना 80 से अधिक सीटों पर दावेदारी कर रही है, जिससे पूरे 227 वार्डों पर गठबंधन की पकड़ सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है. इस प्रक्रिया में सीट बंटवारे पर उत्पन्न टकराव ने अंदरूनी असंतोष को उजागर किया, लेकिन अंत में भाजपा की शहरी पकड़ और संगठनात्मक ताकत के कारण उसका पलड़ा भारी दिखा.
दूसरी तरफ सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की मनसे के बीच 20 साल बाद हुई ऐतिहासिक साझेदारी है. दोनों ठाकरे नेताओं ने मिलकर बीएमसी के लिए गठबंधन की घोषणा की है, जिसमें अधिकांश सीटें शिवसेना (यूबीटी) और शेष मनसे को मिलने की चर्चा है. यह गठजोड़ अपने आप को “मराठी मानूस” की आवाज बताकर मराठी वोटों के साथ-साथ असंतुष्ट शहरी मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है, जबकि कांग्रेस ने इस पूरे समीकरण से अलग होकर अकेले चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया है.
सर्वे और रुझान: किसकी बढ़त, किसकी चुनौती
हालिया सर्वे और विश्लेषणों के अनुसार तस्वीर यह बनती दिख रही है कि बीएमसी में बहुमत के आंकड़े के आसपास बढ़त महायुति गठबंधन के पक्ष में झुकती नजर आ रही है. अनुमानतः महायुति को 110–120 सीटों की रेंज में प्रोजेक्ट किया जा रहा है, जबकि उद्धव–राज गठबंधन के लिए 75–85 सीटों और कांग्रेस के लिए करीब 10–20 सीटों की संभावित तस्वीर सामने रखी जा रही है. यह आंकड़े स्पष्ट तौर पर दिखाते हैं कि मुकाबला त्रिकोणीय है, लेकिन निर्णायक बढ़त फिलहाल सत्तारूढ़ पक्ष के हाथ में मानी जा रही है.
इन अनुमानों को मजबूती देने वाला एक अहम फैक्टर हाल ही में हुए महाराष्ट्र के अन्य स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे हैं, जहां नगर परिषद और स्थानीय चुनावों में महायुति ने जोरदार प्रदर्शन किया. भाजपा और सहयोगियों की इस बढ़त ने यह संकेत दिया कि शहरी और अर्ध–शहरी क्षेत्रों में उनका वोट शेयर स्थिर ही नहीं, बल्कि कई जगहों पर बढ़ा है. यही रुझान अगर बीएमसी चुनाव में दोहराया गया तो विपक्षी गठबंधन के लिए बहुमत का आंकड़ा पार करना मुश्किल हो सकता है.
अहम मुद्दे और वोट बैंक की गणित
बीएमसी चुनाव में सिर्फ गठबंधन नहीं, बल्कि मुद्दे और स्थानीय समीकरण भी उतने ही निर्णायक हैं. मराठी, मुस्लिम, गुजराती, उत्तर भारतीय और अन्य समुदायों सहित विविध सामाजिक भाषाई ढांचा इस नगर निगम की राजनीति को जटिल बनाता है. ठाकरे–मनसे गठबंधन मराठी अस्मिता की अपील पर जोर दे रहा है, जबकि कांग्रेस अल्पसंख्यक और पारंपरिक शहरी वोटरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है. दूसरी ओर, महायुति राज्य सरकार और विकास कार्यों के सहारे “स्थिर शासन और संसाधन” के मुद्दे के साथ मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
इसके साथ ही बीएमसी के कामकाज, भ्रष्टाचार के आरोप, बारिश के दौरान जलजमाव, सड़कों की हालत और स्वास्थ्य–स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं भी चुनावी बहस का हिस्सा हैं. विपक्ष इन्हें “एंटी–इंकम्बेंसी” के रूप में भुनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष नए प्रोजेक्ट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और फंडिंग के आंकड़ों को सामने रखकर खुद को बेहतर विकल्प बताने में जुटा है. मतदाता जिस मुद्दे को प्राथमिकता देगा, वही अंतिम नतीजों पर सबसे बड़ा असर डाल सकता है.
फिर भी, बीएमसी जैसे बड़े महानगर में स्थानीय उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि, मैदान स्तर पर संगठन, मतदान प्रतिशत और आखिरी दिनों की हवा कई बार सर्वे अनुमानों को पलट चुके हैं. इसलिए कहा जा सकता है कि रुझान भले ही महायुति के पक्ष में हों, लेकिन अंतिम फैसला 15 जनवरी को वोटिंग और 16 जनवरी को होने वाली मतगणना ही तय करेगी कि मुंबई की सत्ता पर किसका परचम लहराएगा.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 27, 2025 10:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

