Loan Against Mutual Funds: म्यूचुअल फंड पर लोन कैसे लें? जानें कितना मिलेगा, कितना लगेगा ब्याज
Loan Against Mutual Funds

How to take loan against Mutual Fund: अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए और आप अपने म्यूचुअल फंड निवेश (Mutual Fund Investment) को तोड़ना नहीं चाहते, तो म्यूचुअल फंड के बदले लोन (Loan Against Mutual Funds) एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है. आजकल कई बैंक और एनबीएफसी (NBFC) आपको म्यूचुअल फंड यूनिट्स को गिरवी रखकर लोन की सुविधा देते हैं, जिससे आपके निवेश पर चल रही ग्रोथ बनी रहती है.

कौन ले सकता है म्यूचुअल फंड पर लोन?

हर म्यूचुअल फंड स्कीम पर यह सुविधा नहीं मिलती है. ज्यादातर बैंक और एनबीएफसी लार्ज कैप इक्विटी फंड (Large Cap Equity Funds), डेट फंड (Debt Funds) या लिक्विड फंड (Liquid Funds) को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इनमें जोखिम कम होता है. 18 से 90 वर्ष तक के भारतीय नागरिक, चाहे वह नौकरीपेशा हों या स्व-रोजगार वाले (Self Employment), इस लोन के लिए पात्र होते हैं.

म्यूचुअल फंड यूनिट्स या तो डिमैट फॉर्म (Demat Form) में होनी चाहिए या फिर सीएएमएस/केफिनटेक (CAMS/KFintech) जैसे रजिस्ट्रार के जरिए होल्ड की गई होनी चाहिए. अगर म्यूचुअल फंड किसी और के साथ मिलकर (जॉइंटली) लिया गया है, तो दोनों होल्डरों को को-एप्लिकेंट (Co-Applicant) बनना जरूरी है. डेट फंड्स पर आपको उनकी मौजूदा नेट एसेट वैल्यू (NAV) का 80% तक और इक्विटी फंड्स पर 50-60% तक का लोन मिल सकता है.

किसके लिए है यह लोन फायदेमंद?

नौकरीपेशा लोग, जिन्हें इमरजेंसी में पैसों की जरूरत है, उनके लिए यह लोन फायदेमंद है. इसकी ब्याज दर 10.5% से 12% होती है, जो कि क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन से काफी कम है.

उदाहरण के तौर पर, अगर आपके पास 10 लाख रुपये के डेट फंड हैं, तो आप 8 लाख रुपये तक का लोन सिर्फ 10.5% ब्याज दर पर ले सकते हैं. वहीं, अगर आप 15 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेते हैं, तो उस पर आपको 14% या उससे ज्यादा ब्याज देना पड़ सकता है.

इसके अलावा, हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के लिए भी यह एक बेहतर विकल्प है, क्योंकि इससे वह अपने म्यूचुअल फंड को बेचे बिना टैक्स (15–30%) बचा सकते हैं, जो रिडेम्प्शन (Redemption) करने पर देना पड़ता है.

कैसे करें आवेदन?

आप म्यूचुअल फंड पर लोन के लिए सीधे बैंक या एनबीएफसी की वेबसाइट से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, या फिर उनकी नजदीकी शाखा में जाकर भी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.

कुछ वित्तीय संस्थाएं यह सुविधा कैम्स (CAMS) और केफिनटेक के जरिए ऑनलाइन भी देती हैं. यह दोनों भारत के प्रमुख रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट हैं, जो म्यूचुअल फंड निवेशकों के रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन को संभालते हैं. इनके जरिए म्यूचुअल फंड की खरीद-बिक्री और मैनेजमेंट काफी आसान हो जाता है.

कैसे काम करता है लोन?

म्यूचुअल फंड पर लोन लेने के लिए सबसे पहले आपको अपनी यूनिट्स को गिरवी (Pledge) रखना होता है. इसके तहत आप अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स पर लोनदाता (बैंक या एनबीएफसी) के पक्ष में एक कानूनी अधिकार (लीगल क्लेम) बनाते हैं.

यह प्रक्रिया आपकी म्यूचुअल फंड कंपनी या फिर डिपॉजिटरी (अगर यूनिट्स डिमैट में हैं) के जरिए पूरी की जाती है. एक बार जब लोन अप्रूव हो जाता है, तो तय की गई राशि सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.

कितनी राशि मिल सकती है?

अगर आप म्यूचुअल फंड पर लोन लेना चाहते हैं, तो आपको मिलने वाली रकम आपकी फंड टाइप पर निर्भर करती है. इक्विटी फंड्स पर आपको उनकी मौजूदा वैल्यू (NAV) का 50% से 60% और डेट फंड्स पर 70% से 80% तक लोन मिल सकता है. अगर आपकी जरूरत 5 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच है, और आपके पास डेट फंड्स हैं, तो लोन अगेंस्ट म्यूचुअल फंड एक बेहतरीन विकल्प है.

लोन गारंटी

म्यूचुअल फंड पर मिलने वाले लोन की ब्याज दरें भले ही कम होती हैं, लेकिन इसमें एक जोखिम भी होता है. अगर आपके फंड की नेट एसेट वैल्यू गिरती है, तो लोनदाता आपसे अतिरिक्त गारंटी या आंशिक भुगतान (Partial Payment) की मांग कर सकता है. ऐसी स्थिति से निपटने के लिए आप लोन राशि का 10–15% किसी सुरक्षित निवेश में पहले से अलग रख लें, या फिर पूरी स्वीकृत राशि का उपयोग न करें. इससे जरूरत पड़ने पर आप आसानी से अतिरिक्त गारंटी दे सकेंगे और फाइनेंशियल दबाव से बच पाएंगे.