Bengaluru Liver transplant: पहली बार बेंगलुरु में लीवर ट्रांसपोर्ट मेट्रो ट्रेन से किया गया, व्हाइटफील्ड से राजराजेश्वरी नगर पहुंचाया गया ऑर्गन; VIDEO

बेंगलुरु में एक लीवर ट्रांसप्लांट के लिए मेट्रो ट्रेन का इस्तेमाल किया गया. बेंगलुरु के नम्मा मेट्रो के माध्यम से पहली बार एक मानव लीवर को सफलतापूर्वक ट्रांसपोर्ट किया गया. यह घटना ट्रांसप्लांट के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गई है.

Credit-(X,@DarshanDevaiahB)

Bengaluru Liver transplant: बेंगलुरु में एक लीवर ट्रांसप्लांट के लिए मेट्रो ट्रेन का इस्तेमाल किया गया. बेंगलुरु के नम्मा मेट्रो के माध्यम से पहली बार एक मानव लीवर को सफलतापूर्वक ट्रांसपोर्ट किया गया. यह घटना अंग प्रत्यारोपण के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गई है.जानकारी के मुताबिक़ रात 8:38 बजे वैदेही हॉस्पिटल से लीवर को एंबुलेंस द्वारा व्हाइटफील्ड मेट्रो स्टेशन लाया गया. एक डॉक्टर और सात मेडिकल स्टाफ इस प्रक्रिया में शामिल थे.बेंगलुरु में ये पहली बार हुआ, जब लीवर को मेट्रो की मदद से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया गया.

मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो स्टाफ और एक सहायक सुरक्षा अधिकारी ने टीम का स्वागत किया और सभी दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @DarshanDevaiahB नाम के हैंडल से शेयर किया गया है.ये भी पढ़े:मानवता की मिसाल! ब्रेन डेड मां ने बेटी को दिया जन्म, मौत से पहले किडनी, लीवर और आंख दान कर बचाई कई जिंदगियां

मेट्रो ट्रेन से लीवर का ट्रांसपोर्ट 

66 मिनट में मेट्रो से पहुंचा लीवर

रात 8:42 बजे, लीवर को लेकर मेट्रो ट्रेन व्हाइटफील्ड से रवाना हुई और 9:48 बजे राजराजेश्वरीनगर मेट्रो स्टेशन पहुंची.वहां दूसरी एंबुलेंस और मेडिकल टीम पहले से तैयार थी.मेट्रो स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों की मदद से लीवर को तुरंत हॉस्पिटल भेजा गया.

लीवर ट्रांसप्लांट से बची जान

लीवर को समय पर स्पर्श हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां उसका सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया.हॉस्पिटल की टीम ने मेट्रो स्टाफ, होम गार्ड्स और एएसओ अधिकारियों का धन्यवाद किया जिनकी समन्वित कोशिशों से यह मिशन संभव हो सका.

मंत्रालय और मेट्रो प्रबंधन की सख्त गाइडलाइन्स के अनुसार हुआ ऑपरेशन

बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बताया कि यह पूरा ऑपरेशन आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) और संयुक्त प्रक्रिया आदेश (Joint Procedure Order) के दिशा-निर्देशों के तहत किया गया. यह देश में ऐसा दूसरा मामला है जब मेट्रो ट्रेन का उपयोग अंग परिवहन के लिए किया गया हो.

 

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