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UGC: यूजीसी ने पूछा, राज्य बताएं की स्थानीय भाषा में कौन सी पुस्तकें उपलब्ध नहीं

यूजीसी चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार के मुताबिक सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, विज्ञान आदि में कई कॉलेज और विश्वविद्यालय के स्नातक कार्यक्रमों में मातृभाषा, स्थानीय भाषा में शिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है. इससे हमारे समाज के सभी वर्गों के छात्रों को लाभ हुआ है, विशेष रूप से वंचित वर्गों और ग्रामीण और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले दूरदराज के क्षेत्रों में.

UGC: यूजीसी ने पूछा, राज्य बताएं की स्थानीय भाषा में कौन सी पुस्तकें उपलब्ध नहीं
UGC (Credits: PTI)

यूजीसी भारत की क्षेत्रीय भाषाओं को उच्च शिक्षा में अधिक महत्व देना चाहता है. चिंता का विषय यह है कि उच्च शिक्षा के कई पाठ्यक्रमों के लिए अभी भी पाठ्यपुस्तकें और अध्ययन सामग्री स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं हैं. उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं के अधिक उपयोग के लिए अब देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों से संपर्क किया जा रहा है. यह भी पढ़ें: नाम-चुनाव चिन्ह पर चुनाव आयोग के फैसले को शिवसेना (यूबीटी) कोर्ट में देगी चुनौती

यूजीसी चाहता है कि विभिन्न राज्य और संबंधित विश्वविद्यालय यह बताएं कि उनकी स्थानीय भाषा में कौन सी पाठ्यपुस्तकें या अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं हैं। इसकी बाकायदा एक सूची तैयार की जाए. शिक्षण संस्थान व विशेषज्ञ उन विद्वानों की पहचान करें जो क्षेत्रीय भाषाओं में लिख या अनुवाद कर सकते हैं. राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपराज्यपालों से अपेक्षा की जा रही है कि वे स्थानीय भाषा में अच्छी गुणवत्ता वाली पाठ्यपुस्तकों के निर्माण के प्रयासों को मजबूत करने और मातृभाषा में शिक्षण को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए अन्य आवश्यक कार्रवाई करें.

यूजीसी चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार के मुताबिक सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, विज्ञान आदि में कई कॉलेज और विश्वविद्यालय के स्नातक कार्यक्रमों में मातृभाषा, स्थानीय भाषा में शिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है. इससे हमारे समाज के सभी वर्गों के छात्रों को लाभ हुआ है, विशेष रूप से वंचित वर्गों और ग्रामीण और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले दूरदराज के क्षेत्रों में.

भारतीय भाषाओं के माध्यम से शिक्षण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक प्रमुख क्षेत्र है. शिक्षा नीति मातृभाषा में शिक्षण और शिक्षण सामग्री के महत्व पर जोर देती है। यूजीसी चेयरमैन का कहना है कि यह जानकर खुशी होती है कि हमारे देश में उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा मातृभाषा, स्थानीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को बढ़ावा दिया जाता है और उनका उपयोग किया जाता है.

एनईपी 2020 में अनुशंसित मातृभाषा माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के पहले कदम के रूप में, यह वांछित है कि विज्ञान, वाणिज्य और व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पाठ्यपुस्तकें भी मातृभाषा, स्थानीय भाषा में तैयार की जाएं. वर्तमान में स्थानीय भाषा व मातृभाषा माध्यम से उच्च शिक्षा में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पाठ्यपुस्तकों के लेखन या अनुवाद को बढ़ावा देने से 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशों (जीईआर) में 27 से 50 फीसदी तक सुधार होगा। इससे शिक्षा की पहुंच वंचित सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ेगी.

उपरोक्त सभी को ध्यान में रखते हुए, यूजीसी ने स्थानीय भाषा में कार्य को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न राज्यों के कुलपतियों की एक शीर्ष समिति भी गठित की है। यूजीसी का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थान पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने और मातृभाषा में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का समर्थन करने में एक रणनीतिक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इन प्रयासों को मजबूत करने और मातृभाषा में पाठ्यपुस्तकों को लिखने और अन्य भाषाओं की अच्छी पुस्तकों के अनुवाद सहित शिक्षण में स्थानीय भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित करने जैसी पहलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है.

यूजीसी अब अपनी इस मुहिम में विभिन्न राज्य सरकारों, मुख्यमंत्री और राज्यपालों की मदद चाहती है. उनसे अनुरोध किया गया है कि अपने राज्य में उच्च शिक्षा संस्थानों को प्रेरित और प्रोत्साहित करें व उच्च शिक्षण संस्थानों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 17, 2023 09:59 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).