दिल्ली में दिवाली के बाद वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. धुंध और स्मॉग की चादर ने लोगों का सांस लेना मुश्किल कर दिया है. इसी बीच एक वरिष्ठ अधिकारी का अनुभव सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP शेष पाल वैद्य का कहना है कि दिल्ली की हवा में कुछ दिनों की सांस लेना भी जानलेवा साबित हो रहा है.
पूर्व DGP वैद्य ने बताया कि वे परिवार के साथ दिल्ली में 15 दिन रहे और इस दौरान सभी की तबीयत खराब हो गई. गला बैठना, नाक बहना और गले में तेज जलन जैसे लक्षण उभर आए. उन्होंने X (ट्विटर) पर लिखा, “ऐसा लग रहा है जैसे हमने 1000 सिगरेट एक साथ पी ली हों!” वैद्य ने चिंता जताई कि अगर कुछ दिन का यह असर है, तो दिल्ली में रह रहे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की हालत क्या होती होगी?
सरकार और कोर्ट पर उठाए सवाल
पूर्व DGP वैद्य ने कहा कि यह सिर्फ पर्यावरण नहीं बल्कि मानवता का संकट है. उन्होंने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट से पूछा, “आखिर कब तक दिल्ली को गैस चैंबर बनने दिया जाएगा? जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने कहा कि अब सिर्फ उपायों की बातें नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है.
सोशल मीडिया पर बहस तेज
उनकी इस पोस्ट पर हजारों प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. कई लोगों ने उनकी बात का समर्थन किया और कहा कि प्रदूषण पर कोई ठोस समाधान दिखाई नहीं दे रहा. एक यूजर ने लिखा, “हम सब वही झेल रहे हैं, पर कोई स्वीकार ही नहीं करना चाहता.”
दिल्ली की हवा में हर सांस बढ़ा रही खतरा
एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार ‘बेहद खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है. डॉक्टरों के अनुसार ऐसी हवा सीधे फेफड़ों की कमजोरी, दमा और हृदय रोग, बच्चों के स्वास्थ्य, बुजुर्गों की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रही है.













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