नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में प्रदूषण (Pollution) केवल स्मॉग (Smog) और जहरीली गैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यहां की हवा में खतरनाक 'सुपरबग्स' (Superbugs) (दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया) का स्तर भी काफी बढ़ गया है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन के अनुसार, दिल्ली के इनडोर और आउटडोर दोनों वातावरणों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया की मौजूदगी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है.
JNU के स्कूल ऑफ एनवायरमेंटल साइंसेज की शोधकर्ता हिमानी कुमारी और माधुरी सिंह के इस अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली की हवा में 'स्टेफिलोकोकल' (Staphylococcal) बैक्टीरिया का भार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक है. यह सूक्ष्मजीव संक्रमण का कारण बनते हैं और हवा के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सकते हैं.
अध्ययन के लिए वसंत विहार शहरी स्लम, मुनीरका मार्केट कॉम्प्लेक्स, मुनीरका अपार्टमेंट और जेएनयू स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसे विभिन्न शहरी इलाकों से नमूने लिए गए थे. यह भी पढ़ें: Delhi-NCR Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार, CAQM ने GRAP-3 की हटाईं पाबंदियां
सर्दियों में बढ़ जाता है खतरा
अध्ययन में पाया गया कि इन बायोएरोसोल (Bioaerosols) का स्तर मौसम के अनुसार बदलता रहता है.
- सर्दियां: दिल्ली की ठंडी और स्थिर हवा में इन 'सुपरबग्स' का स्तर अपने चरम पर होता है.
- मानसून: बारिश के दौरान आउटडोर वातावरण में इनका संदूषण थोड़ा कम दर्ज किया गया.
73% बैक्टीरिया पर दवाओं का असर नहीं
अध्ययन की सबसे चिंताजनक बात यह है कि हवा में पाए गए 73 प्रतिशत मेतिसिलिन-प्रतिरोधी स्टेफिलोकोकी (MRS) 'मल्टीड्रग रेजिस्टेंस' (MDR) से ग्रसित हैं. इसका मतलब है कि इन पर आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाएं जैसे बीटा-लैक्टम, मैक्रोलाइड्स और जेंटामाइसिन बेअसर साबित हो रही हैं.
जेनेटिक विश्लेषण में 'mecA' जीन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो बैक्टीरिया को मेतिसिलिन जैसी शक्तिशाली दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है. यह भी पढ़ें: Weather Update Today: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और कोहरे का 'येलो अलर्ट', दक्षिण में बारिश के आसार; जानें अपने शहर के मौसम का हाल
पब्लिक हेल्थ के लिए 'रेड अलर्ट'
शोधकर्ताओं का कहना है कि शहरी वातावरण में एंटीबायोटिक प्रतिरोध का यह हवाई भंडार एक छिपी हुई महामारी की तरह है. यदि समय रहते प्रभावी निगरानी और नियंत्रण रणनीतियां विकसित नहीं की गईं, तो भविष्य में सामान्य संक्रमणों का इलाज करना भी असंभव हो सकता है.
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रदूषण के उच्च स्तर के दौरान मास्क का उपयोग न केवल धूल के कणों से बचने के लिए, बल्कि इन दवा-प्रतिरोधी सूक्ष्मजीवों से बचने के लिए भी अनिवार्य होना चाहिए.













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