'हिम्मत है तो पहलगाम पीड़ितों के परिवार से कहो भारत-PAK मैच देखें', लोकसभा में बोले ओवैसी
ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में सरकार से तीखे सवाल पूछे. उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से जाकर सरकार कहे कि अब आप भारत-पाकिस्तान का मैच देखें, अगर उसमें हिम्मत है.
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में सरकार से तीखे सवाल पूछे. उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से जाकर सरकार कहे कि अब आप भारत-पाकिस्तान का मैच देखें, अगर उसमें हिम्मत है. ओवैसी ने भाषण की शुरुआत में उन 26 नागरिकों को श्रद्धांजलि दी जिन्हें उनके नाम और धर्म देखकर मार डाला गया. ओवैसी ने भारतीय सेना को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए बधाई दी और कहा कि इससे देश में एकता का संदेश गया. हालांकि साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने इस एकता के माहौल को सही दिशा क्यों नहीं दी?
ओवैसी ने प्रधानमंत्री के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि “खून और पानी साथ नहीं बह सकते”. उन्होंने पूछा, “तो फिर पाकिस्तान से क्रिकेट मैच कैसे खेला जा सकता है? क्या सरकार के पास इतनी नैतिक ताकत है कि वो शहीदों के परिवारों को कह सके कि हमने बदला ले लिया, अब मैच देखिए?”
पहलगाम किसने किया?
उन्होंने कहा, हम पाकिस्तान का 80% पानी रोक रहे हैं, ये कहते हुए कि पानी और खून साथ-साथ नहीं बहेंगे. क्या आप क्रिकेट मैच खेलेंगे? मेरी अंतरात्मा मुझे वो मैच देखने की इजाजत नहीं देती. पहलगाम किसने किया? हमारे पास 7.5 लाख सेना और केंद्रीय अर्धसैनिक बल हैं. ये चार चूहे कहां से घुस आए और हमारे भारतीय नागरिकों को मार डाला? जवाबदेही किस पर तय होगी?..."
जवाबदेही की मांग
7.5 लाख जवानों की तैनाती के बावजूद आतंकियों का देश में घुसकर हमला करना कैसे संभव हुआ. इस पर ओवैसी ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केवल ऑपरेशन से काम नहीं चलेगा, जवाबदेही तय करनी होगी. चाहे वह एलजी की हो, आईबी की हो या स्थानीय प्रशासन की.
‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’, तो क्रिकेट क्यों?
370 हटने के बाद भी हमले क्यों?
उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह कदम सही था, तो फिर आतंकी हमले क्यों जारी हैं? ओवैसी ने भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों के सामने भारत की चुप्पी शर्मनाक है. उन्होंने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर और ऑपरेशनल सबमरीन की कमी पर भी चिंता जताई.