Dadar Kabutarkhana Video: कोर्ट के आदेश पर BMC ने सील किया था दादर कबूतरखाना, जैन समुदाय की भीड़ ने तोड़ा कवर, जबरन खोला कबूतरों को दाना डालने का स्थान; देखें वीडियों
(Photo Credits @rushikesh_agre_)

Dadar Kabutarkhana Video: मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने कबूतरों की बीट से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों का हवाला देते हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को शहर के सभी ‘कबूतरखानों’ (पक्षी दाना स्थल) को तत्काल बंद करने का आदेश दिया. इस आदेश के तहत बीएमसी ने दादर के प्रसिद्ध कबूतरखाना को मंगलवार 5 अगत को सील कर दिया. इसके विरोध में बुधवार सुबह जैन समुदाय के सैकड़ों लोग दादर कबूतरखाना के पास सड़कों पर उतर आए और बीएमसी द्वारा लगाए गए कवर को तोड़कर जबरन कबूतरों को दाना डालने का स्थान खोल दिया.

दादर कबूतरखाना के सील को तोड़ा गया

दादर कबूतरखाना के सील को तोड़ने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी, पुरुष और महिलाएं, उस स्थान पर धावा बोलते हुए दिखाई दिए, जहां उन्होंने बीएमसी द्वारा दाना डालने से रोकने के लिए लगाए गए बांस और तिरपाल के कवर को फाड़ दिया. अधिकारियों के प्रयासों के बावजूद, दादर कबूतरखाना बुधवार सुबह करीब 10 बजे जबरन खोल दिया गया. यह घटना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा मंगलवार को कबूतरों को दाना डालने पर आंशिक छूट की घोषणा के एक दिन बाद हुई. यह भी पढ़े: Dadar Kabutarkhana Video: बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद BMC ने बंद किया मुंबई का दादर कबूतरखाना, देखें वीडियो

 दादर कबूतरखाना को खोला गया

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अब तक 980 कबूतरों की मौत!

प्रदर्शन को और भड़काने वाली बात यह थी कि कबूतरखाना सील होने के बाद कई कबूतरों की भूख से मौत की खबरें सामने आईं. दादर कबूतरखाना ट्रस्ट के सदस्य संदीप देसाई ने दावा किया कि इस दौरान करीब 980 कबूतरों की मौत हो चुकी है.

मुख्यमंत्री फडणवीस की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को इस मुद्दे पर एक बैठक की और कहा, “कबूतरों के जीवन को बचाना, पर्यावरण की रक्षा करना और नागरिकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करना, ये तीनों महत्वपूर्ण हैं.” उन्होंने कबूतरों के मल के स्वास्थ्य प्रभावों पर वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की और बीएमसी से सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नियंत्रित दाना डालने की नीति तैयार करने का आग्रह किया. उन्होंने बीएमसी को बीकेसी, महालक्ष्मी रेसकोर्स, आरे कॉलोनी और संजय गांधी नेशनल पार्क में अस्थायी दाना डालने के क्षेत्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया.

विवाद का राजनीतिक रंग

यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप ले चुका है। मुंबई उपनगर के संरक्षक मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बीएमसी आयुक्त को पत्र लिखकर कबूतरखानों के विध्वंस पर चिंता जताई और वैकल्पिक समाधानों की मांग की. हालांकि, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने लोढ़ा के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी स्वच्छता को भावनाओं के लिए समझौता नहीं करना चाहिए.

शिवसेना MLC मनीषा कायंदे ने सदन में उठाया था यह मुद्दा

दरअसल पिछले महीने महाराष्ट्र विधान परिषद में शिवसेना नेता और मनोनीत विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनीषा कायंदे ने यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि कबूतरखाने आसपास के निवासियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा करते हैं, क्योंकि कबूतरों की बीट और पंख सांस संबंधी बीमारियों जैसे हाइपरसेंसिटिव न्यूमोनाइटिस, क्रिप्टोकोकोसिस और अन्य एलर्जी का कारण बन सकते हैं. उनके द्वारा इस मुद्दे को उठाने के बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 31 जुलाई को बीएमसी को कबूतरों को दाना डालने पर सख्ती से रोक लगाने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया.