पत्नी के कपड़ों और खाने पर टिप्पणी 498A के तहत क्रूरता नहीं; बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणी
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मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने हाल ही में एक अहम निर्णय सुनाया, जिसमें कहा गया कि पत्नी के कपड़ों या खाना पकाने के तरीके पर टिप्पणी करना भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत “क्रूरता” की श्रेणी में नहीं आता. जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस संजय देशमुख की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए पति, सास-ससुर और दो ननदों के खिलाफ दर्ज 498A का केस रद्द कर दिया. अदालत ने कहा, “सिर्फ यह कहना कि पत्नी सही कपड़े नहीं पहन रही है या अच्छा खाना नहीं बना पा रही है, गंभीर मानसिक या शारीरिक क्रूरता नहीं माना जा सकता.”

मामला क्या था?

मार्च 2022 में शादी के बाद शुरुआती एक महीने तक रिश्ते अच्छे रहे, लेकिन पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके बाद पति और ससुराल वालों ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न शुरू किया. उसका कहना था कि पति की मानसिक बीमारी छुपाकर शादी की गई, ससुराल वालों ने दिवाली पर 15 लाख रुपये फ्लैट के लिए मांगे, गिफ्ट न लाने पर उसे अपमानित किया और जून 2023 में घर से निकाल दिया. इसके अलावा, फोन मॉनिटरिंग और चरित्र पर सवाल उठाने जैसे आरोप भी लगाए गए.

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कोर्ट की नजर में सबूत कमजोर

अदालत ने पाया कि पत्नी के आरोप बिना ठोस सबूत के थे. बेंच ने कहा, “शिकायतकर्ता के बयान के अलावा चार्जशीट में कुछ भी ठोस नहीं है.” चैट रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि पत्नी को शादी से पहले ही पति की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी थी.

रिश्तों में तनाव और ‘बढ़ा-चढ़ा कर’ आरोप

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब रिश्ते बिगड़ जाते हैं, तो अक्सर आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है. यदि आरोप इतने गंभीर नहीं हैं कि 498A के तहत ‘क्रूरता’ की परिभाषा में फिट बैठें, तो ऐसे मामलों में ट्रायल चलाना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.