सुप्रीम कोर्ट ने BMC सहित महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में देरी पर SEC को लगाई फटकार; 31 जनवरी 2026 तक सभी इलेक्शन कराने का आदेश
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Supreme Court On Maharashtra Local Body Elections:  सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित स्थानीय निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर राज्य चुनाव आयोग (SEC) को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि सभी स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी 2026 तक पूरे किए जाएं, और इसके लिए कोई और समय विस्तार नहीं दिया जाएगा. इसके साथ ही, परिसीमन प्रक्रिया को 31 अक्टूबर 2025 तक पूरा करने का आदेश दिया गया है.

चुनाव में देरी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों पर जस्टिस सूर्य कांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को इस मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के वकील से तल्खी भरे लहजे में पूछा, “क्या चुनाव हुए? जनवरी तक विस्तार क्यों मांगा जा रहा है?” कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मई 2025 के आदेश में चार महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसमें कोई प्रगति नहीं दिख रही. जस्टिस कांत ने टिप्पणी की, “आपकी निष्क्रियता आपकी अक्षमता को दर्शाती है. देरी के कारणों को मौखिक रूप से स्पष्ट करें. यह भी पढ़े: BMC चुनाव से पहले शिवसेना UBT को बड़ा झटका, प्रवक्ता संजना घाड़ी, उनके पति और पूर्व नगरसेवक संजय घाड़ी ने थामा शिंदे गुट का दामन; VIDEO

देरी के पीछे बताए गये ये वजह

महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि जिला परिषदों और पंचायत समितियों के लिए परिसीमन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन BMC सहित अन्य नगर निगमों का परिसीमन अभी चल रहा है. इसके अलावा, 29 नगर निगमों के लिए पहली बार एक साथ चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके लिए 65,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) उपलब्ध हैं, लेकिन 50,000 अतिरिक्त मशीनों की आवश्यकता है. इन अतिरिक्त EVM के लिए ऑर्डर दे दिए गए हैं.

देरी के अन्य कारण

देरी के अन्य कारणों में ओबीसी आरक्षण पर विवाद, स्कूल बोर्ड परीक्षाएं, और कर्मचारियों व अधिकारियों की अनुपलब्धता शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश

परिसीमन की समय सीमा: शेष परिसीमन प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 तक पूरी की जाए. परिसीमन को चुनाव टालने का बहाना नहीं बनाया जा सकता.

चुनाव की अंतिम तिथि: सभी स्थानीय निकाय चुनाव, जिसमें BMC और अन्य नगर निगम शामिल हैं, 31 जनवरी 2026 तक पूरे किए जाएं. इसके लिए कोई और समय विस्तार नहीं दिया जाएगा.

स्कूल परीक्षाओं का बहाना नहीं: मार्च 2026 में होने वाली स्कूल बोर्ड परीक्षाओं को चुनाव टालने का आधार नहीं माना जाएगा

कर्मचारियों की नियुक्ति: महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को तत्काल सभी आवश्यक कर्मचारियों को रिटर्निंग ऑफिसर और अन्य सहायक भूमिकाओं के लिए नियुक्त करने का निर्देश दिया गया

SEC की निष्क्रियता पर कोर्ट की नाराजगी

राज्य चुनाव आयोग पर SC ने की नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग (SEC) की निष्क्रियता पर गहरी नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि SEC ने समय पर कार्रवाई करने में विफलता दिखाई है, जिसके कारण स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित हो रही है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिसीमन, EVM की कमी, या अन्य कोई बहाना अब स्वीकार नहीं होगा. चुनाव समय पर कराने की जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य सरकार और SEC की है.

महाराष्ट्र में BMC चुनाव का महत्व

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) भारत की सबसे अमीर नगर निगमों में से एक है, और इसके चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लंबे समय से लंबित इन चुनावों में देरी से मुंबई की प्रशासनिक और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उम्मीद है कि BMC और अन्य स्थानीय निकायों में जल्द ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल होगी.