अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो सुबह-सुबह या शाम को कबूतरों को दाना डालना एक पुण्य का काम समझते हैं, तो आपके लिए एक बहुत जरूरी खबर है. अब ये काम आपको मुश्किल में डाल सकता है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐसा आदेश दिया है जिसके बाद कबूतरों को दाना खिलाने वालों पर FIR दर्ज हो सकती है.
तो आखिर हुआ क्या है?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि झुंड में कबूतरों को दाना डालना एक तरह की "सार्वजनिक परेशानी" है. आसान भाषा में कहें तो इससे आम लोगों को दिक्कत होती है और उनकी सेहत को भी खतरा है. कोर्ट इस मामले को लेकर काफी सख्त है.
कोर्ट ने इसे खतरा क्यों माना?
अब सवाल ये उठता है कि दाना खिलाने में क्या खतरा है? दरअसल, कोर्ट का मानना है कि जहां बहुत सारे कबूतर दाना खाने के लिए इकट्ठा होते हैं, वहां कई तरह की समस्याएँ पैदा होती हैं.
- लोगों की सेहत को खतरा: कबूतरों की बीट और पंखों से निकलने वाली धूल से कई लोगों को एलर्जी और सांस की बीमारियाँ हो सकती हैं. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है.
- सार्वजनिक परेशानी: जब सैकड़ों कबूतर एक जगह जमा होते हैं, तो वो गंदगी फैलाते हैं. इससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी होती है. उनकी बालकनियाँ, गाड़ियाँ और घर गंदे होते हैं. इसी को कोर्ट ने सार्वजनिक परेशानी कहा है.
पहले भी चेताया था, पर लोग नहीं माने
ऐसा नहीं है कि यह मामला अचानक सामने आया है. कोर्ट ने पहले भी कहा था कि कबूतरों के लिए बनाए गए अवैध कबूतरखानों को गिराया जाए और दाना डालने की इजाजत नहीं दी जा सकती. लेकिन, इसके बावजूद लोग नहीं माने और कबूतरों को दाना खिलाना जारी रखा. इसी वजह से कोर्ट को अब इतना सख्त कदम उठाना पड़ा.
कोर्ट का फाइनल आदेश क्या है?
कोर्ट ने अब नगर निगम (BMC) को सीधे निर्देश दिए हैं कि जो भी व्यक्ति नियमों को तोड़कर कबूतरों को दाना डालता हुआ पाया जाए, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाए और FIR दर्ज की जाए. कोर्ट ने कहा कि अब कानून की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
तो कुल मिलाकर बात यह है कि जिसे हम-आप एक नेक काम समझते थे, वो अब सार्वजनिक स्वास्थ्य और शांति के लिए एक समस्या बन गया है. इसलिए, अगर आप भी कबूतरों को दाना डालते हैं, तो अब इस आदत को बदलने का समय आ गया है, वरना आपको कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.













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