Karnataka Politics: कर्नाटक में बड़ा संवैधानिक उलटफेर, राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्वीकार किया मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा; मंत्रिपरिषद भंग
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा (Photo Credits: File Image)

बेंगलुरु, 29 मई: कर्नाटक के राजनीतिक (Karnataka Politics) पटल से आज की सबसे बड़ी संवैधानिक खबर सामने आ रही है. राज्य के राज्यपाल थावरचंद गहलोत (Governor Thawarchand Gehlot) ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Chief Minister Siddaramaiah) का इस्तीफा आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही राज्यपाल ने राज्य की कांग्रेस नीत मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) को भी तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश जारी कर दिया है. यह महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम सिद्धारमैया द्वारा कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के अनुसार लोक भवन जाकर अपना औपचारिक त्यागपत्र सौंपने के बाद उठाया गया है. इस राजनीतिक पुनर्गठन के साथ ही राज्य में मध्य-कार्यकाल के सत्ता-साझेदारी समझौते (Power-Sharing Agreement) का चरण पूरा हो गया है. यह भी पढ़ें: Siddaramaiah Resignation: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे देंगे इस्तीफा; डीके शिवकुमार होंगे नए सीएम (Watch Video)

इस्तीफा स्वीकार; डीके शिवकुमार के लिए रास्ता साफ

राजभवन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्यपाल ने सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार करते हुए नई सरकार के गठन तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में बने रहने को कहा है. इस बड़े बदलाव के बाद अब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.

माना जा रहा है कि कांग्रेस विधायक दल (CLP) की आगामी औपचारिक बैठक में शिवकुमार को सर्वसम्मति से नया नेता चुन लिया जाएगा, जिसके बाद वे जल्द ही नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे.

कर्नाटक के राज्यपाल ने सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया

मध्य-कार्यकाल सत्ता समझौता हुआ पूरा

कर्नाटक में इस बड़े सत्ता परिवर्तन की पटकथा साल 2023 के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद ही लिख दी गई थी. उस समय कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबा गतिरोध चला था.

पार्टी आलाकमान ने तब दोनों नेताओं के बीच एक गुप्त ढाई-ढाई साल का सत्ता-साझेदारी समझौता (Mid-tenure Power-sharing Pact) कराया था. इसी संस्थागत समझौते का पालन करते हुए सिद्धारमैया ने गरिमा के साथ अपने पद से कदम पीछे खींचे हैं, ताकि शिवकुमार को उनका कार्यकाल सौंपा जा सके.

विधायक दल की बैठक और नए मंत्रिमंडल का गठन

मंत्रिपरिषद के भंग होने के बाद अब बेंगलुरु में राजनीतिक हलचलें और तेज हो गई हैं. कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक और राज्य प्रभारी पहले से ही बेंगलुरु में डेरा डाले हुए हैं.

अगले २४ से ४८ घंटों के भीतर कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आधिकारिक तौर पर डीके शिवकुमार के नाम पर मुहर लगाई जाएगी. इसके तुरंत बाद नई मंत्रिपरिषद और कैबिनेट मंत्रियों के नामों की सूची राज्यपाल को सौंपी जाएगी, जिसके बाद नई सरकार का आधिकारिक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा.