B Merwan & Co Shuts Down: मायानगरी मुंबई के ऐतिहासिक और खान-पान के परिदृश्य में एक युग का अंत हो गया है. ग्रांट रोड रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर स्थित 112 साल पुराना प्रतिष्ठित ईरानी कैफे 'बी. मेरवान एंड कंपनी' (B Merwan & Co) हमेशा के लिए बंद हो गया है. 1 जनवरी 2026 की सुबह जब नियमित ग्राहक वहां पहुंचे, तो उन्हें शटर पर एक हस्तलिखित नोटिस मिला, जिस पर लिखा था— "हम बंद हैं. आपके संरक्षण के लिए धन्यवाद." 1914 में स्थापित यह कैफे पीढ़ियों से मुंबईवासियों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा रहा है.
मावा केक और पुरानी यादों का केंद्र
बी. मेरवान अपने सिग्नेचर मावा केक के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध था. यह केक इतने लोकप्रिय थे कि सुबह 5:30 बजे बेकरी खुलते ही कुछ ही मिनटों में बिक जाते थे. कैफे की विक्टोरियन शैली की सजावट, इतालवी संगमरमर की मेजें, पुरानी लकड़ी की कुर्सियां और बड़े प्राचीन दर्पण ग्राहकों को 'पुराने बॉम्बे' की याद दिलाते थे. यहां का बन मस्का, ईरानी चाय और पुडिंग न केवल किफायती थे, बल्कि उनका स्वाद भी दशकों से अपरिवर्तित रहा था. यह भी पढ़े: Jimmy Boy Restaurant Shuts Down: मुंबई का एक और ऐतिहासिक पारसी भोजनालय ‘जिम्मी बॉय’ कैफे बंद, 100वीं वर्षगांठ से कुछ महीने पहले लगा ताला
बंद होने के पीछे के कारण
हालांकि मालिकों ने बंद होने का कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन खबरों के अनुसार इसके पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं.
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पारिवारिक निर्णय: तीसरे और चौथे दशक के मालिकों की बढ़ती उम्र और अगली पीढ़ी की व्यवसाय में कम रुचि एक बड़ी वजह बताई जा रही है.
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बढ़ती लागत: आधुनिक दौर में परिचालन लागत का बढ़ना और लकड़ी के ओवन (firewood ovens) के उपयोग पर सरकारी प्रतिबंधों ने भी पुराने बेकर्स के लिए मुश्किलें खड़ी की थीं.
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संपत्ति का विकास: जिस इमारत में यह कैफे स्थित था, उसके पुनर्विकास या बिक्री की चर्चाएं भी लंबे समय से चल रही थीं.
गायब होती ईरानी कैफे संस्कृति
बी. मेरवान का बंद होना मुंबई की लुप्त होती ईरानी कैफे संस्कृति के लिए एक बड़ा नुकसान है. 20वीं सदी के मध्य में शहर में सैकड़ों ऐसे कैफे थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर 25 से भी कम रह गई है. आधुनिक कॉफी चेन और बदलती जीवनशैली के बीच ये कैफे अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. शहर के इतिहासकारों का कहना है कि बी. मेरवान का बंद होना केवल एक दुकान का बंद होना नहीं है, बल्कि मुंबई के उस सामाजिक ताने-बाने का खत्म होना है जहां अमीर-गरीब सब एक ही मेज पर बैठकर चाय पीते थे.












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