मुंबई: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आगामी मेयर चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक बड़ा 'पावर गेम' खेलते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों को बड़ा झटका दिया है. सूत्रों के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुटों (अजित पवार और शरद पवार गुट) से नवनिर्वाचित चार नगरसेवक शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं. इस बदलाव के साथ ही बीएमसी में शिंदे गुट के पार्षदों की संख्या 29 से बढ़कर 33 हो गई है.
महायुति का बढ़ा पलड़ा
इस नए सियासी घटनाक्रम के बाद बीएमसी सदन में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है. चार नए पार्षदों के आने से अब बीएमसी में महायुति (शिवसेना, भाजपा और एनसीपी-अजित पवार) की कुल सदस्य संख्या 122 तक पहुंच गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम मेयर पद पर काबिज होने की महायुति की रणनीति का एक अहम हिस्सा है. यह भी पढ़े: Mumbai New Mayor: मुंबईकरों को 11 फरवरी को मिलेगा नया मेयर, BJP या शिवसेना; सस्पेंस अब भी बरकरार
विपक्षी खेमे में सेंधमारी
नवनिर्वाचित पार्षदों का शिवसेना में शामिल होना एनसीपी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब सभी दल बीएमसी में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए गठबंधन और समर्थन की संभावनाएं तलाश रहे हैं. शिंदे गुट में शामिल होने वाले पार्षदों का तर्क है कि वे मुख्यमंत्री के विकास कार्यों और क्षेत्र की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए इस गुट के साथ आए हैं.
मेयर चुनाव पर पड़ेगा सीधा असर
मुंबई नगर निकाय (BMC) में सत्ता का केंद्र माने जाने वाले मेयर पद के चुनाव अब और दिलचस्प हो गए हैं. शिंदे गुट की संख्या बढ़ने से न केवल पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) के लिए अपनी चुनावी रणनीति को बचा पाना एक बड़ी चुनौती बन गया है. महायुति की 122 की संख्या बहुमत के आंकड़े के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.













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