बलिया,उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य तंत्र की लचर व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है.गुरुवार देर रात एक प्रसव पीड़ित महिला को हॉस्पिटल लाया गया, लेकिन न वहां डॉक्टर मिला, न नर्स, और न ही कोई अन्य स्वास्थ्यकर्मी. मजबूरन महिला को अस्पताल परिसर के फर्श पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा. इस घटना के बाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश की लचर स्वास्थ सुविधा और हॉस्पिटल के डॉक्टर्स और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का उदाहरण सामने आया है. इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के कई छोटे शहरों से इस तरह की लापरवाही के वीडियो सामने आएं थे.
इस वीडियो के सामने आने के बाद अब स्वास्थ विभाग के अधिकारियों और हॉस्पिटल प्रशासन पर भी उंगलियां उठ रही है. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @sirajnoorani नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:VIDEO: उत्तर प्रदेश की शर्मनाक व्यवस्था! आगरा में महिला ने सड़क किनारे दिया बच्चे को जन्म, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ने एडमिट करने से किया था मना
महिला ने फर्श पर दिया बच्चे को जन्म
A woman was taken to Sonbarsa Health Center in #Ballia district of #UttarPradesh for delivery, but there was neither a bed nor a doctor. The woman gave birth to the child on the floor of the same hospital without any arrangement.
1/2 ⤵️ pic.twitter.com/jh3ac49Yfw
— Siraj Noorani (@sirajnoorani) May 25, 2025
मुख्य द्वार खुला, कमरे बंद मिले
बैरिया के लक्ष्मण छपरा गांव के निवासी सविता पटेल, जो गुरुवार रात करीब 1 बजे प्रसव पीड़ा के साथ हॉस्पिटल पहुंची थी, अस्पताल के मुख्य द्वार को खुला पाकर अंदर तो पहुंच गईं, लेकिन हॉस्पिटल के कमरे ताले में बंद थे. मौके पर कोई डॉक्टर या नर्स मौजूद नहीं थी. दर्द से कराहती महिला को कोई सुविधा न मिल पाने के कारण उसने खुले फर्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया.
परिजनों को नहीं मिल मदद
महिला के साथ आए परिजन हॉस्पिटल परिसर में डॉक्टर और नर्स को ढूंढते रहे लेकिन कोई जिम्मेदार कर्मी नजर नहीं आया. हॉस्पिटल में न बेड उपलब्ध था और न ही कोई व्यवस्था.महिला को लेटने के लिए जगह तक नहीं मिली, जिससे उसने हॉस्पिटल के गेट के पास बरामदे में फर्श पर ही प्रसव किया.
वीडियो वायरल, प्रशासन हरकत में आया
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया.मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संजीव वर्मन ने मौके पर पहुंचकर जांच की और मामले को 'घोर लापरवाही और अक्षमता' करार दिया, सीएमओ ने बताया कि घटना के समय हॉस्पिटल में न नाइट गार्ड था और न ही कोई चिकित्सा कर्मी,अधिकतर कर्मचारी ड्यूटी पर आने की बजाय घर पर सो रहे थे,
तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई
सीएमओ ने हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है,साथ ही एसीएमओ स्तर के अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं, सभी सीएचसी और पीएचसी को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो,
राजनीतिक दलों का विरोध
घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं, समाजवादी पार्टी के विधायक जय प्रकाश अंचल ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है, वहीं पूर्व भाजपा सांसद भरत सिंह की बेटी विजय लक्ष्मी ने हॉस्पिटल में धरना देकर जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की.
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना न केवल सोनबरसा सीएचसी की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है, प्रसव जैसी आपात स्थिति में भी यदि महिला को न्यूनतम स्वास्थ्य सुविधा न मिले, तो यह न केवल मानवाधिकार का उल्लंघन है बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का भी प्रमाण है.












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