8th Pay Commission News: कर्मचारी संघों ने की ₹69,000 न्यूनतम वेतन की मांग, गणना के लिए '5 फैमिली यूनिट' का नया फॉर्मूला प्रस्तावित
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Pixabay)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन ढांचे में आमूल-चूल बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. नेशनल काउंसिल (National Council) (JCM) (Joint Consultative Machinery) के माध्यम से कर्मचारी संघों ने 14 अप्रैल को 8वें वेतन आयोग के समक्ष एक व्यापक ज्ञापन प्रस्तुत किया है. इस प्रस्ताव में मौजूदा न्यूनतम मासिक वेतन को बढ़ाकर ₹69,000 करने की मांग की गई है. संघों का तर्क है कि अब समय 'जीवन निर्वाह वेतन' (Survival Wage) से आगे बढ़कर 'वैज्ञानिक जीवन स्तर वेतन' (Scientific Living Wage) की ओर बढ़ने का है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल जरूरतों के बढ़ते खर्चों को शामिल किया गया है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा अपडेट: क्या केंद्रीय कर्मचारियों को जनवरी 2026 से मिलेगा डीए एरियर? जानें पूरी जानकारी

'5 फैमिली यूनिट' का नया मॉडल प्रस्तावित

इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 'फैमिली यूनिट' (परिवार की इकाई) की परिभाषा में बदलाव है. दशकों से वेतन आयोग एक परिवार को तीन इकाइयों (कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चे, जिन्हें 0.5-0.5 इकाई माना जाता है) के आधार पर गणना करता आया है.

अब कर्मचारी संघों ने इसे बढ़ाकर पांच इकाइयों वाला मॉडल बनाने की मांग की है. इसमें कर्मचारी, जीवनसाथी और दो बच्चों के साथ-साथ 'आश्रित माता-पिता' को भी शामिल किया गया है. ज्ञापन में कहा गया है कि यह बदलाव 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम' के अनुरूप है और आधुनिक भारतीय परिवारों की वास्तविक वित्तीय जिम्मेदारियों को दर्शाता है.

खान-पान और कैलोरी के नए मानक

यूनियनों ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अपडेटेड दिशा-निर्देशों के आधार पर उपभोग के मानकों को बदलने की भी मांग की है:

  • कैलोरी की मात्रा: शारीरिक रूप से सक्रिय श्रमिकों के लिए दैनिक मानक 2,700 kcal से बढ़ाकर लगभग 3,490 kcal करने का प्रस्ताव है.
  • पोषण की गुणवत्ता: प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों, डेयरी, फल और सब्जियों की बढ़ती कीमतों को आधार बनाने की बात कही गई है.
  • डिजिटल जरूरतें: पहली बार तकनीक और इंटरनेट से जुड़े खर्चों को भी वेतन फॉर्मूले के मुख्य घटक में शामिल करने की मांग की गई है.

फिटमेंट फैक्टर और वार्षिक वेतन वृद्धि

न्यूनतम वेतन ₹69,000 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संघों ने 3.83 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया है. गौरतलब है कि 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था. इसके अलावा, ज्ञापन में कुछ और संरचनात्मक सुधारों का प्रस्ताव है:

  1. वार्षिक वृद्धि: वर्तमान 3 प्रतिशत की वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया जाए.
  2. वेतन अंतर: सबसे कम और सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के बीच के अनुपात को सीमित कर 1:12 किया जाए.
  3. पदोन्नति में सुधार: मध्यम प्रबंधन स्तर पर गतिरोध कम करने के लिए विशिष्ट पे-लेवल के विलय का सुझाव दिया गया है. यह भी पढ़ें: 8th Pay Commission Pay Hike: कब बढ़ेगी आपकी सैलरी? फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन पर आया बड़ा अपडेट

आर्थिक तर्क और फीडबैक की समय सीमा

यद्यपि इस वेतन वृद्धि से सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ेगा, लेकिन NC-JCM का मानना है कि यह अर्थव्यवस्था के लिए 'कैटेलिस्ट' का काम करेगा. संघों का तर्क है कि लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के पास अधिक पैसा होने से बाजार में मांग बढ़ेगी, जिससे अंततः टैक्स राजस्व में वृद्धि होगी.

8वें वेतन आयोग ने 'MyGov' प्लेटफॉर्म के माध्यम से औपचारिक परामर्श खिड़की खोल दी है.  कर्मचारी और पेंशनभोगी 30 अप्रैल तक आधिकारिक प्रश्नावली के माध्यम से आठ मुख्य विषयों पर अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे सकते हैं.