AR Rahman के 'सांप्रदायिक' वाले बयान पर मचा बवाल: BJP ने आरोपों को नकारा, विपक्ष ने जताई चिंता; जानें क्या है पूरा विवाद
ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान के हिंदी फिल्म उद्योग में 'पावर शिफ्ट' और 'सांप्रदायिक कारकों' वाले बयान ने राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में बहस छेड़ दी है. बीजेपी ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे केवल प्रतिभा का मामला बताया है.
नई दिल्ली/मुंबई: दिग्गज संगीतकार ए.आर. रहमान (A.R. Rahman) के हालिया बयान ने फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. रहमान ने एक इंटरव्यू में संकेत दिया कि पिछले आठ वर्षों में हिंदी फिल्म उद्योग (बॉलीवुड) में सत्ता का केंद्र बदला है और संभवतः कुछ 'सांप्रदायिक' कारणों की वजह से उन्हें मिलने वाले काम में कमी आई है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बॉलीवुड केवल योग्यता और प्रतिभा पर चलता है, धर्म पर नहीं.
रहमान की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेताओं और मंत्रियों ने कहा कि उनके दावों में कोई सच्चाई नहीं है और कहा कि फिल्म इंडस्ट्री टैलेंट और काबिलियत के आधार पर काम करती है, धर्म के आधार पर नहीं. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (Union Minister Ramdas Athawale) ने कहा कि वह रहमान के आरोपों से असहमत हैं, और बताया कि कई जाने-माने मुस्लिम कलाकार देश भर में बड़े पैमाने पर सफलता और तारीफ हासिल कर रहे हैं. यह भी पढ़ें: AR Rahman Health Update: एआर रहमान को अस्पताल से मिली छुट्टी, डिहाइड्रेशन और गर्दन में दर्द के बाद हॉस्पिटल में थे भर्ती
रहमान का आरोप: 'पावर शिफ्ट और सांप्रदायिक पहलू'
बीबीसी एशियन नेटवर्क के साथ बातचीत में रहमान ने कहा कि 90 के दशक में उन्हें कभी भेदभाव महसूस नहीं हुआ, लेकिन पिछले आठ साल अलग रहे हैं. उन्होंने कहा: 'शायद पिछले आठ वर्षों में एक 'पावर शिफ्ट' हुआ है और अब उन लोगों के पास ताकत है जो रचनात्मक नहीं हैं. यह एक सांप्रदायिक बात भी हो सकती है, लेकिन यह मेरे सामने नहीं होता. मुझे केवल 'चाइनीज व्हिस्पर' (उड़ती-उड़ती खबरें) के जरिए पता चलता है कि किसी प्रोजेक्ट के लिए मुझे बुक किया गया था, लेकिन म्यूजिक कंपनी ने बाद में पांच अन्य संगीतकारों को रख लिया.'
बीजेपी और फिल्मी हस्तियों की प्रतिक्रिया
बीजेपी नेताओं ने रहमान के दावों को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताया है.
- रामदास अठावले (केंद्रीय मंत्री): उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में सलमान, शाहरुख और आमिर खान जैसे कलाकारों को पूरे देश का प्यार मिलता है. रहमान के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है.
- सैयद पाशा (बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा): उन्होंने याद दिलाया कि रहमान को 2025 में सर्वश्रेष्ठ संगीत के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला है, जो साबित करता है कि योग्यता को सम्मान मिल रहा है.
- जावेद अख्तर और शोभा डे: गीतकार जावेद अख्तर ने कहा कि निर्माताओं को शायद लगता होगा कि रहमान अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं, इसलिए वे उनसे संपर्क करने में हिचकिचाते हैं. वहीं, शोभा डे ने इस टिप्पणी को 'खतरनाक' करार दिया.
विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दलों ने रहमान के बयान को गंभीरता से लेने की अपील की है.
- कांग्रेस: सांसद तारिक अनवर और इमरान मसूद ने कहा कि अगर ऑस्कर विजेता स्तर का कलाकार ऐसा कह रहा है, तो यह देश के लिए चिंता का विषय है। धर्म के आधार पर भेदभाव से समाज में नफरत बढ़ेगी.
- नजीब जंग (पूर्व उपराज्यपाल): उन्होंने सीधे तौर पर स्वीकार किया कि कुछ मामलों में मुस्लिमों को उनके धर्म की वजह से काम मिलने में परेशानी होती है और इसे छिपाया नहीं जाना चाहिए. यह भी पढ़ें: Delhi High Court Rules Against AR Rahman: दिल्ली हाईकोर्ट का ए.आर. रहमान पर बड़ा फैसला, कॉपीराइट उल्लंघन पर ठोका 2 लाख का जुर्माना
'ताल' से मिली थी असली पहचान
रहमान ने इंटरव्यू में अपने भाषाई सफर पर भी बात की। उन्होंने बताया कि 'रोजा' और 'बॉम्बे' की सफलता के बाद भी वह खुद को 'आउटसाइडर' महसूस करते थे। 1999 की फिल्म 'ताल' के बाद ही उन्हें उत्तर भारत के हर घर में पहचान मिली. उन्होंने निर्देशक सुभाष घई की सलाह पर हिंदी सीखने के बजाय उर्दू सीखी, क्योंकि वह इसे 60-70 के दशक के संगीत की जननी मानते हैं.