Saif Ali Khan Legal Setback: सैफ अली खान को भोपाल की 15,000 करोड़ की पैतृक संपत्ति पर बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने घोषित की ‘दुश्मन संपत्ति’

बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान को बड़ा कानूनी झटका लगा है. मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल की उनकी करीब 15,000 करोड़ की पैतृक संपत्ति को ‘दुश्मन संपत्ति’ घोषित कर दिया है. यह फैसला उस निचली अदालत के फैसले को पलटता है, जिसमें सैफ, उनकी बहनें सोहा और सबा अली खान और मां शर्मिला टैगोर को संपत्ति का वैध वारिस माना गया था.

Saif Ali Khan (Photo Credits: Wikimedia Commons)

Saif Ali Khan Legal Setback: बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान को बड़ा कानूनी झटका लगा है. मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल की उनकी करीब ₹15,000 करोड़ की पैतृक संपत्ति को ‘दुश्मन संपत्ति’ घोषित कर दिया है. यह फैसला उस निचली अदालत के फैसले को पलटता है, जिसमें सैफ, उनकी बहनें सोहा और सबा अली खान और मां शर्मिला टैगोर को संपत्ति का वैध वारिस माना गया था. यह विवाद नवाब हमीदुल्ला खान के वंशजों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति के बंटवारे को लेकर है. नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान (सैफ की परदादी) के पक्ष में हुए बंटवारे को अन्य उत्तराधिकारियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. कोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद सैफ अली खान की इस शाही विरासत पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

माना जा रहा है कि इस फैसले से सिर्फ सैफ ही नहीं बल्कि पटौदी खानदान की पूरी अगली पीढ़ी पर भी असर पड़ेगा. दुश्मन संपत्ति घोषित होने के चलते इस रॉयल प्रॉपर्टी पर कानूनी रूप से मालिकाना हक पाना बेहद मुश्किल हो सकता है. अब देखना होगा कि सैफ अली खान और उनका परिवार इस फैसले के खिलाफ आगे सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं या नहीं. फिलहाल, यह मामला एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है और फिल्मी दुनिया के साथ-साथ लीगल सर्कल में भी जोरदार बहस का विषय बना हुआ है.

सैफ को भोपाल की 15,000 करोड़ की पैतृक संपत्ति पर झटका:

सैफ अली खान के लिए यह मामला सिर्फ पैसों या संपत्ति का नहीं, बल्कि खानदान की विरासत और पहचान से भी जुड़ा हुआ है. पटौदी खानदान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत लंबे समय से देश की शाही धरोहर का अहम हिस्सा मानी जाती रही है. ऐसे में हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद न सिर्फ कानूनी लड़ाई और लंबी हो सकती है, बल्कि इससे परिवार की भावनात्मक जुड़ाव और गौरव को भी गहरी चोट पहुंची है. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि सैफ और उनका परिवार अगला कदम क्या उठाते हैं, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ अदालत की नहीं बल्कि इतिहास और परंपरा को बचाने की भी है.

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