Union Budget 2026: बजट 2026 से पहले जानें इनकम टैक्स स्लैब, नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था में क्या है आपके लिए बेहतर?

 Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल यानी 1 फरवरी को अपना नौवां बजट (Budget 2026) पेश करने जा रही हैं. मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की निगाहें इस बार भी इनकम टैक्स में राहत पर टिकी हैं. पिछले बजट में किए गए बदलावों के बाद 'नई टैक्स व्यवस्था' (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बनाया गया था, जिसमें ₹12.75 लाख तक की आय को प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री कर दिया गया था.

नई टैक्स व्यवस्था (मौजूदा स्लैब)

नई टैक्स व्यवस्था सरल है, लेकिन इसमें 80C और HRA जैसी अधिकांश छूटों का लाभ नहीं मिलता. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए मौजूदा स्लैब इस प्रकार हैं: यह भी पढ़े:  Union Budget 2026: क्या रविवार को शेयर बाजार खुलेगा या बंद रहेगा? जानें 1 फरवरी को NSE और BSE में ट्रेडिंग होगी या नहीं

आय का स्लैब टैक्स की दर
₹4,00,000 तक शून्य
₹4,00,001 से ₹8,00,000 5%
₹8,00,001 से ₹12,00,000 10%
₹12,00,001 से ₹16,00,000 15%
₹16,00,001 से ₹20,00,000 20%
₹20,00,001 से ₹24,00,000 25%
₹24,00,000 से ऊपर 30%

बड़ी राहत: धारा 87A के तहत मिलने वाले रिबेट के कारण ₹12 लाख तक की शुद्ध आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता. ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़कर, ₹12.75 लाख तक की ग्रॉस सैलरी पर टैक्स शून्य हो जाता है.

पुरानी टैक्स व्यवस्था (विकल्प के रूप में)

पुरानी टैक्स व्यवस्था उन लोगों के लिए बेहतर है जो होम लोन, बीमा और बच्चों की पढ़ाई जैसी लंबी अवधि की योजनाओं में निवेश करते हैं. इसमें दरें अधिक हैं लेकिन छूट के विकल्प भी ज्यादा हैं.

  • ₹2,50,000 तक: शून्य (60 साल से कम आयु वालों के लिए)

  • ₹2.5 लाख से ₹5 लाख: 5%

  • ₹5 लाख से ₹10 लाख: 20%

  • ₹10 लाख से ऊपर: 30%

बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें?

बाजार विशेषज्ञों और टैक्स सलाहकारों को उम्मीद है कि इस बार वित्त मंत्री मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए कुछ 'फाइन-ट्यूनिंग' कर सकती हैं:

  1. स्टैंडर्ड डिडक्शन: वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख किया जा सकता है.

  2. धारा 80C: पुरानी व्यवस्था में निवेश की सीमा ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹2-3 लाख करने की मांग उठ रही है.

  3. इनकम टैक्स एक्ट 2025: नए आयकर अधिनियम के लागू होने से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देशों की भी प्रतीक्षा है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो सकता है.

कौन सा विकल्प चुनें?

अगर आपकी कुल डिडक्शन (80C, HRA, होम लोन ब्याज आदि) ₹3.75 लाख से अधिक है, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था आपके लिए अधिक फायदेमंद हो सकती है. अन्यथा, नई टैक्स व्यवस्था कम दरों और आसान फाइलिंग के साथ बेहतर विकल्प साबित होती है.