नयी दिल्ली, 26 दिसंबर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत की और इस दौरान अपने 'शांति फार्मूले' को लागू करने में भारत का समर्थन मांगा।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार मोदी ने कहा कि रूस और यूक्रेन को अपने मतभेदों का स्थायी समाधान खोजने के लिए वार्ता और कूटनीति की ओर लौटना चाहिए। उन्होंने जेलेंस्की को भरोसा दिया कि भारत किसी भी शांति प्रयास का समर्थन करेगा।
जेलेंस्की ने एक ट्वीट कर बताया कि उन्होंने जी-20 में भारत की सफल अध्यक्षता के लिए मोदी को शुभकामनाएं दी और साथ ही जी-20 के मंच पर प्रस्तावित अपने 'शांति फार्मूले' का उल्लेख करते हुए इसे लागू करने के लिए नयी दिल्ली के समर्थन पर भरोसा जताया।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे उन भारतीय छात्रों की शिक्षा जारी रखने के लिए व्यवस्था करें, जिन्हें इस वर्ष की शुरुआत में यूक्रेन से लौटना पड़ा था।
ज्ञात हो कि यूक्रेन पर 24 फरवरी से शुरू हुए रूसी आक्रमण के बाद सैकड़ों भारतीय मेडिकल छात्र स्वदेश लौट आए थे। उनकी आगे की पढ़ाई को लेकर संसद सहित विभिन्न मंचों पर चिंता जताई जा चुकी है।
पीएमओ ने कहा, ‘‘दोनों नेताओं ने यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बारे में भी विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध को तत्काल समाप्त करने के अपने आह्वान को दृढ़ता से दोहराया और कहा कि दोनों पक्षों को अपने मतभेदों का स्थायी समाधान खोजने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटना चाहिए।
बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने किसी भी शांति प्रयास के लिए भारत के समर्थन से भी जेलेंस्की को अवगत कराया और प्रभावित नागरिक आबादी के लिए मानवीय सहायता प्रदान करना जारी रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।
पीएमओ ने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जी-20 की अध्यक्षता के लिए भारत को शुभकामनाएं दीं।
उसने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने भारत के जी-20 की अध्यक्षता की मुख्य प्राथमिकताओं के बारे में बताया, जिसमें खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विकासशील देशों की चिंताओं को आवाज देना शामिल है।’’
इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के अवसरों पर भी चर्चा की।
जेलेंस्की ने कहा कि वह अपने शांति फार्मूले के कार्यान्वयन के लिए भारत की भागीदारी की उम्मीद करते हैं।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मैंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बात की और जी-20 की सफल अध्यक्षता की कामना की। इसी मंच पर मैंने शांति फार्मूले की घोषणा की थी और अब मैं इसके कार्यान्वयन में भारत की भागीदारी की उम्मीद करता हूं। मैंने मानवीय सहायता और संयुक्त राष्ट्र में समर्थन के लिए भी धन्यवाद दिया।’’
जेलेंस्की ने इंडोनिशया के बाली में हाल ही में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए यह प्रस्ताव रखा था।
ज़ेलेंस्की ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए जिस 10-सूत्रीय "शांति फार्मूला" को सामने रखा था, जिनमें युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करना, यूक्रेन से सभी रूसी सैनिकों को वापस भेजा जाना और अपने देश की क्षेत्रीय अखंडता को बहाल करना शामिल था।
योजना के तहत, उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया था। इसमें कहा गया था कि जब सभी "युद्ध विरोधी उपायों" को लागू किया जाए तो युद्ध के अंत की पुष्टि करने वाले एक दस्तावेज पर पार्टियों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने चाहिए।
मोदी और पुतिन ने 16 सितंबर को उज्बेकिस्तान के समरकंद में द्विपक्षीय बैठक की थी जिस दौरान भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा था कि 'आज का युग युद्ध का नहीं है।
फरवरी में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से, प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के साथ-साथ ज़ेलेंस्की से कई बार बात की है।
मोदी ने चार अक्टूबर को जेलेंस्की के साथ फोन पर बातचीत में कहा था कि इसका कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता और भारत किसी भी शांति प्रयास में योगदान देने के लिए तैयार है।
भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की निंदा नहीं की है और यह कहता रहा है कि संकट का कूटनीति और बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
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