देश की खबरें | गोरखनाथ मंदिर पुन: खुलने पर योगी ने की पूजा अर्चना
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मंदिर परिसर में योगी के आगमन के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे। मंदिर के गर्भ गृह को फूलों से सजाया गया था और हर जगह सेनेटाइजर रखे हुए थे, जिनका उपयोग बिना छुए किया जा सकता है।

मंदिर आने वाले हर व्यक्ति ने दो गज की दूरी का कड़ाई से पालन किया और परिसर में प्रवेश से पहले सेनेटाइजर का इस्तेमाल किया। मंदिर के पुजारियों ने भी मास्क पहन रखा था।

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बाद में वह महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के तहत संचालित होने वाले संस्थानों के प्रमुखों से मिले। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना ऐसे युवा तैयार करने के उददेश्य से की गयी थी जो राष्ट्र के प्रति समर्पित हों और सामाजिक बदलाव ला सकते हों।

योगी ने कहा कि महामारी के समय में जिम्मेदारी बढ जाती है और आप सभी को उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ चुनौती का सामना करना है। आपको कोरोना से बचाव को लेकर छात्रों और उनके माता पिता के माध्यम से जागरूकता पैदा करनी है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें और ऐसा करते वक्त दो गज की दूरी का पालन करें। मौजूदा परिस्थितियों में हमें नये रास्ते निकालने होंगे। ऑनलाइन परीक्षा की प्रक्रिया अपनाइये और फीस जमा करने से लेकर माता पिता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का प्रयास करें।

योगी ने सोमवार को ही आजमगढ़ भ्रमण के दौरान जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब, इमरजेंसी वार्ड, सीटी स्कैन वार्ड, साफ-सफाई, चिकित्सीय व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता आदि की भी जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने कोविड-19 की जांच के लिए जिला अस्पताल में स्थापित की गयी ट्रू-नेट मशीन का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के उपचार के लिए प्रोटोकॉल के अनुसार सभी उपाय सुनिश्चित किये जाएं।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि कोरोना महामारी के चलते जिन मरीजों का आपरेशन लम्बित हैं, उनकी ट्रू-नेट मशीन द्वारा जांच करें कि मरीज में कोरोना के लक्षण तो नहीं हैं। यदि जांच के उपरान्त मरीज की जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है, तभी उसकी सर्जरी की जाये। यदि जांच रिपोर्ट में कोरोना के लक्षण प्रतीत होते हैं, तो उनके नमूने को जांच के लिए भेजा जाय एवं उस मरीज को पृथक-वास में रखा जाय।

उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि गम्भीर बीमारी से पीड़ित मरीजों का आपरेशन प्राथमिकता के आधार पर करें और जो मरीज इमरजेंसी में आता है तो उसका इलाज तत्परता के साथ किया जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि मरीजों का बेहतर इलाज किया जाय, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही न की जाए।

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