नयी दिल्ली, आठ सितंबर जलवायु परिवर्तन से निपटने में प्रगति हुई है, लेकिन दुनिया पेरिस समझौते के दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करने की राह से बहुत दूर है। ग्लोबल स्टॉक टेक (जीएसटी) पर शुक्रवार को प्रकाशित संयुक्त राष्ट्र की एक तकनीकी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
‘जीएसटी’, पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सामूहिक वैश्विक प्रगति का आकलन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा दो साल में की गई समीक्षा है।
सबसे पहले ‘जीएसटी’ की शुरुआत नवंबर 2021 में ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी26) में हुई और इस साल दुबई में सीओपी28 के दौरान समाप्त होगी।
संयुक्त राष्ट्र की व्यापक रिपोर्ट ‘‘न्याय और समानता’’ पर आधारित जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
वर्ष 2015 में अपनाए गए पेरिस समझौते ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की नींव रखी, लेकिन रिपोर्ट प्रतिबद्धता के मौजूदा स्तर में असमानताओं को पेश करती है।
जलवायु प्रभावों का बोझ विकासशील देशों पर असमान रूप से पड़ता है, जिससे समानता एक केंद्रीय चिंता बनकर उभरती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘समानता के जरिये पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने की संभावना को बढ़ाना चाहिए। जलवायु प्रभावों से सबसे अधिक प्रभावित लोगों को समाधान तैयार करने में शामिल किया जाना चाहिए।’’
रिपोर्ट जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने के महत्व को रेखांकित करती है, जो शून्य उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण कारक है।
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