देश की खबरें | लॉकडाउन के चलते अपने गांव लौटने वाले कामगारों को अनुग्रह राशि देने से मना नहीं किया सकता: अदालत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 30 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 के मद्देनजर काम के अभाव के चलते अपने गांव लौटने वाले कामगारों को अनुग्रह राशि देने से महज यह कहकर इनकार नहीं किया जा सकता कि भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड(बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू) में पंजीकृत होने के लिये उनका शारीरिक रूप से सत्यापन नहीं हो पाया है।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि ऐसे मजदूर फिलहाल वापस नहीं आ सकते, लिहाजा सत्यापन का काम फोन या वीडियो कॉल के जरिये किया जाना चाहिये।

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उच्च न्यायालय ने कहा कि निर्माण स्थल पर शारीरिक सत्यापन का विकल्प उन मजदूरों के लिये उपलब्ध रहेगा, जो इस विकल्प को चुनते हैं।

पीठ ने बोर्ड की ओर से पेश दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील संजॉय घोष और वकील उर्वी मोहन की इस दलील पर सहमति नहीं जतायी कि डीएमआरसी और लार्सन एंड टर्बो जैसी बड़ी कंपनियों के बड़े निर्माण स्थलों पर मजदूरों का शारीरिक रूप से सत्यापन किया जाना चाहिए।

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पीठ ने कहा कि शारीरिक रूप से सत्यापन करने से वे मजदूर छूट जाएंगे, जो कोरोना वायरस महामारी के चलते अपने घर चले गए हैं और फिलहाल वापस नहीं लौट सकते। लिहाजा, अगर ऐसे कामगारों ने शारीरिक सत्यापन नहीं कराया तो दिल्ली लौटने पर उन्हें अनुग्रह राशि नहीं मिल सकेगी।

अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार एलेडिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में सभी श्रमिकों का बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू अधिनियम के तहत पंजीकरण करने की मांग की गई थी ताकि प्रत्येक श्रमिक को लॉकडाउन के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से दी गई 5,000 रुपये की मासिक अनुग्रह राशि मिल सके।

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