जरुरी जानकारी | घर से काम, ऑनलाइन पढ़ाई ने डिजिटल सुविधाओं में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत बढ़ाई: ट्राई प्रमुख

नयी दिल्ली, 21 सितंबर दूरसंचार नियामक ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने सोमवार को कहा कि घर से काम, ‘ऑनलाइन’ पठन-पाठन और घर में मनोरंजन के उपायों ने मजबूत डिजिटल ढांचागत सुविधा की जरूरत बढ़ा दी है, इसके लिये खासकर फाइबर के जरिये घरों तक इंटरनेट सुविधा, डेटा सेंटर,वाई-फाई हॉटस्पॉट के विस्तार जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है।

उन्होंने दूरसंचार संबंधी ढांचागत सुविधा और सेवाओं को देश के डिजिटल और आर्थिक वृद्धि के लिये महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत दूरसंचार ढांचागत सुविधाएं बिना किसी बाधा के कनेक्टिविटी में प्रमुख भूमिका अदा करेंगी जो सही मायने में डिजिटलीकरण का सार है।

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शर्मा ने टावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसएिशन (टीएआईपीए) के एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘कनेक्ट इंडिया मिशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा की जरूरत है और यह तभी संभव है, जब क्षेत्र में अगले एक-दो साल में इसके लिये जरूरी निवेश किया जाए ...।’’

हालांकि, व्यापक स्तर पर 4 जी का विस्तार हुआ है लेकिन अभी भी बेहतर सेवाओं के लिये व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा, ‘‘उपयुक्त दूरसंचार ढांचागत सुविधाओं के निर्माण का दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है और दूरसंचार सेवाओं की वृद्धि का असर अर्थव्यवस्था की वृद्धि पर पड़ता है। इसीलिए जरूरी है कि हम बुनियादी ढांचा में अधिक-से -अधिक निवेश करें।’’

शर्मा ने कहा कि भारत तेजी से तीव्र डिजिटलीकरण की ओर बढ़ा है। दूरसंचार और सॉफ्टवेयर में महत्वपूर्ण क्षमताओं को देखते हुए, देश नई डिजिटल तकनीकों और मंचों से लाभान्वित होने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटल इंडिया को हकीकत रूप देने और 5 जी, इंटरनेट आधारित उपकरणों (इंटरनेट ऑफ थिंग्स), मशीनों के बीच संचार, कृत्रिम मेधा जैसी भविष्य की प्रौद्योगिकी के लिये भी मजबूत दूरसंचार ढांचागत सुविधा महत्वपूर्ण है।’’

शर्मा ने कहा कि कोविड-19 संकट ने डिजिटलीकरण को जरूरी विकल्प बना दिया है। ऐसे में नई और संपर्क मुक्त सेवाओं की तैनाती से डिजिटल ढांचागत सुविधाओं की मांग बढ़ेगी।

शर्मा ने कहा कि अभी भी कुछ चुनौतियां हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कम ढांचागत सुविधाओं, कम आबादी घनत्व और व्यवहारिक व्यापार मामले के अभाव जैसी कुछ चुनौतियां हैं। इनका समाधान उपयुक्त नीतिगत उपायों के जरिये होना चाहिए।

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