नयी दिल्ली, 17 जुलाई दिल्ली के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा की गई उच्च जोखिम वाली सर्जरी से महिला और 26 सप्ताह के उनके जुड़वा बच्चों की जान बचा ली गई। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि महिला की हाल ही में दो सर्जरी की गई, जिसमें एक आंतों की रुकावट को सफलतापूर्वक हटा दिया गया और एक ‘सी-सेक्शन’ किया गया, जिसमें उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया । इन बच्चों का जन्म समय से पहले (प्रीमैच्योर) हुआ।
शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह सब कोविड-19 से निपटने के लिए लगाये गये लॉकडाउन में हुआ। दोनों बच्चे चमत्कारिक ढंग से बच गये। इनमें से एक में समस्याएं थी और बच्चे की दो महीने की अवधिव में दो सर्जरी करनी पड़ी।’’
प्रवक्ता ने बताया कि महिला की दो सर्जरी की गई और मार्च के अंत में शिशुओं एक बालक और एक बालिका को जन्म दिया। लड़की का वजन 800 ग्राम था और लड़के का वजन 1000 ग्राम था।
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अस्पताल में विभाग, नियोनेटोलॉजी के निदेशक एवं प्रमुख डा विवेक जैन ने बताया, ‘‘प्रसव के वक्त बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा, जिससे वे स्थिर हो सकें और फिर उन्हें फेफड़ों के लिए दवाएं दी गईं और कृत्रिम आहार दिया गया।’’
डॉ. जैन ने बताया कि दोनों बच्चों की आंत में जन्म के तीसरे दिन ही कुछ समस्या हो गई थी जो उनकी मां में भी थी।
प्रवक्ता ने बताया कि लड़के को सर्जरी की जरूरत थी और लड़की को नहीं थी।
उन्होंने बताया कि पहली सर्जरी की शुरुआत में पेट के बगल में एक ‘पाउच’ का निर्माण किया गया और आंत को ठीक होने के लिए छोड़ दिया गया। छह से आठ हफ्ते बाद एक और सर्जरी की गई ताकि आंत की छेद को बंद किया जा सके।
डा जैन ने बताया कि दोनों सर्जरी के बीच में बच्चा जिंदगी के लिए लड़ रहा था और उसे कई प्रकार का डिस्ट्रेस, सेप्सिस, सांस में तकलीफ और हाइपोटेंशन भी हो गया था।
चिकित्सक ने बताय, ‘‘हालांकि इन सभी समस्याओं का मुकाबला करते हुए बच्चा ठीक हुआ और जन्म के 12 सप्ताह बाद उन्हें उनके माता-पिता को सौंप दिया गया। यह किसी दैवीय कृपा से कम नहीं है कि बच्चा जिसने दो-दो सर्जरी झेली और वह प्रीमैच्योर पैदा हुआ वह अब ठीक है।’’
अस्पताल सूत्रों ने बताया कि जून में पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद बच्चों को घर ले जाया गया है।
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