देश की खबरें | कुलपति की नियुक्ति के मुद्दे पर न्यायालय के फैसले का पालन करेंगे: बंगाल के शिक्षा मंत्री

कोलकाता, 16 सितंबर पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य संचालित 13 विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति और उनके चयन के लिए एक खोज समिति गठित करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।

राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने यहां शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत करती है। मंत्री ने कहा कि सरकार उच्चतम न्यायालय के सभी निर्देशों का पालन करेगी।

बसु ने कहा, ‘‘हमारा हमेशा से यह मानना ​​था कि राज्य सरकार से चर्चा करके हर विश्वविद्यालय में एक खोज समिति गठित की जाए। हम प्रत्येक विश्वविद्यालय में यथाशीघ्र ऐसी समितियां चाहते हैं।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘हम माननीय न्यायालय के निर्देश पर गठित समिति को स्वीकार करेंगे और इसके कामकाज में सहयोग करेंगे।’’

मंत्री ने सोशल मीडिय मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राज्य के अनुरोध पर कुलपति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद उच्चतम न्यायालय ने कुलपति के प्रति नाखुशी जताई थी। उसने बंगाल की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि अंतरिम उपाय लगातार जारी नहीं रह सकते। न्यायालय ने खोज समिति के गठन की जिम्मेदारी खुद पर ली तथा राज्य सरकार, कुलपति और यूजीसी को हफ्तेभर में तीन से पांच उम्मीदवारों के नाम देने हैं।’’

शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को राज्यपाल, राज्य सरकार और यूजीसी से कहा कि वे अपने-अपने स्तर पर तीन से पांच उम्मीदवारों के नाम 25 सितंबर तक सुझाएं।

शीर्ष अदालत, कलकत्ता उच्च न्यायालय के 28 जून के उस आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल द्वारा 11 राज्य संचालित विश्वविद्यालयों में अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति के आदेश में कुछ अवैध नहीं है, क्योंकि राज्यपाल इन विश्वविद्यालयों के पदेन कुलाधिपति हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और राज्यपाल सी वी आनंद बोस के बीच इस बात को लेकर खींचतान जारी है कि राज्य के विश्वविद्यालयों का संचालन किस तरह किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि कुलपतियों की नियुक्ति पर राज्य सरकार का विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए लंबित था और कहा कि न्यायालय खुद एक खोज समिति गठित करेगा।

शीर्ष अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 27 सितंबर को करेगी।

इस बीच, राजभवन ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन में रिक्त पदों का पता लगाने और विश्वविद्यालय प्रणाली को दुरूस्त करने के तरीके सुझाने के लिए एक कुलपति समिति का गठन किया गया है।

बयान में कहा गया है कि साथ-साथ मूल्यांकन के लिए राजभवन में एक वास्तविक समय पर आधारित निगरानी प्रकोष्ठ भी स्थापित किया गया है। इसमें कहा गया है कि कुलपति चौबीसों घंटे इस प्रकोष्ठ से संपर्क कर शिकायतें भेज सकते हैं।

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