नयी दिल्ली, 21 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और आप सरकार से पूछा कि वह एक जनहित याचिका पर जवाब दे जिसमें आरोप लगाया गया है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बिना किसी वैध कारण के करीब 12 हजार महिलाओं की विधवा पेंशन रोक दी।
न्यायमूर्ति डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने दिल्ली सरकार और मंत्रालय को नोटिस जारी कर याचिका में उठाए गए मुद्दों पर 26 अगस्त तक जवाब देने के लिए कहा है।
वकील अखिल राणा और उत्कर्ष शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि पेंशन को ‘घर का पता नहीं मिला’ जैसे ‘‘फर्जी, गैर तार्किक’’ कारणों से बंद कर दिया गया या रोक दिया गया।
याचिका में दावा किया गया है कि पेंशन के आवेदक उसी पते पर रह रहे हैं जो उन्होंने आवेदन में मुहैया कराया है।
महिलाओं को अपनी बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता भी नहीं दी जा रही है।
याचिका में आग्रह किया गया है कि आवेदकों के सत्यापन के बाद उनकी विधवा पेंशन जल्द जारी की जाए।
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