देश की खबरें | प. बंगाल सरकार, एसईसी ने केंद्रीय बल समन्वयक को सहयोग नहीं किये जाने के आरोप पर जवाब दाखिल किया

कोलकाता, 26 जुलाई पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने पंचायत चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती में सहयोग नहीं किये जाने के बीएसएफ महानिरीक्षक द्वारा लगाये गए आरोपों पर बुधवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष अपना जवाब दाखिल किया।

उच्च न्यायालय ने 12 जुलाई को एसईसी और राज्य सरकार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारी की रिपोर्ट पर हलफनामे के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने का निर्देश दिया था, जो पश्चिम बंगाल में आठ जुलाई के ग्रामीण चुनावों के लिए केंद्रीय बलों के बल समन्वयक थे।

दोनों ने उन अवमानना याचिकाओं पर अदालत के निर्देश के बाद मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम और न्यायमूर्ति उदय कुमार की खंडपीठ के समक्ष अपने हलफनामे दायर किए, जिसमें आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय बलों की तैनाती और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उसके पहले के आदेशों का एसईसी और राज्य प्राधिकारियों द्वारा पालन नहीं किया गया।

अदालत ने चार जुलाई को राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों की तैनाती का निर्देश दिया था। इससे पहले 21 जून को उच्च न्यायालय ने एसईसी से कहा था कि वह पंचायत चुनावों में तैनाती के लिए 82,000 से अधिक केंद्रीय बलों के जवानों की मांग करे और उनकी संख्या राज्य में 2013 के ग्रामीण चुनावों के दौरान तैनात की गई संख्या से अधिक होनी चाहिए।

एसईसी के वकील ने कहा कि बल समन्वयक की रिपोर्ट में उठाए गए सभी बिंदुओं पर अगली सुनवाई की तारीख पर ध्यान दिया जाएगा।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक चक्रवर्ती ने कहा कि समन्वयक की रिपोर्ट में तैनाती योजना प्रस्तुत करने में देरी की ओर इशारा किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पर्याप्त नहीं है कि योजना जिला मजिस्ट्रेट को भेजी गई थी।

उन्होंने कहा कि बूथवार तैनाती की योजना काफी पहले बताई जानी चाहिए थी, जिससे केंद्रीय बलों की तैनाती में मदद मिलती। एसईसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस रमण ने कहा कि असहयोग के 14 आरोप थे तथा दावा किया कि वे मुख्य रूप से तैनाती योजना में कथित देरी, संवेदनशील बूथों के बारे में जानकारी उचित समय के भीतर न देना और जिलेवार तैनाती पर केंद्रीय बल कमांडर को सलाह देना शामिल है।

उन्होंने दावा किया कि एसईसी ने समयसीमा के भीतर उचित तेजी के साथ काम किया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा ग्रामीण चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती के बारे में उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखे जाने के बाद, आदेश को अक्षरश: स्वीकार करके एक संयुक्त अभ्यास किया जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि जिनकी जान चली गईं, उन्हें अवमानना का नियम जारी करके या मुआवजे के जरिए वापस नहीं लाया जा सकता।

मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

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