देश की खबरें | पश्चिम बंगाल सरकार पौष मेला चाहरदिवारी मुद्दे पर समिति के पास जा सकती है : अदालत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

कोलकाता, एक अक्टूबर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पौष मेला मैदान में यथास्थिति बनाये रखने का पश्चिम बंगाल सरकार का अनुरोध खारिज कर दिया है और उसे मेला स्थल पर चाहरदिवारी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए उसके द्वारा नियुक्त की गयी समिति से संपर्क करने को कहा है।

उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त की गयी समिति के निर्देश पर सोमवार को पौष मेला मैदान पर चाहरदिवारी का काम प्रारंभ हो गया। समिति में उच्च न्यायालय के दो वर्तमान न्यायाधीश हैं।

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चाहरदीवार के निर्माण पर स्थगन की सरकार की अर्जी खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश टी बी एन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति शंपा सरकार की खंडपीठ ने बुधवार को कहा कि राज्य चाहरदिवारी से जुड़े किसी भी मुद्दे के लिए समिति के पास जा सकता है।

विश्वभारती ने पौष मेला मैदान पर जब चाहरदीवार खड़ी करने का प्रयास किया था तब 17 अगस्त को इस विश्वविद्यालय के परिसर में हिंसक घटनाएं एवं तोड़फोड़ की गयी थीं।

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निर्माण कार्य पर स्थगन का अनुरोध करते हुए राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता अभरजीत मजूमदार ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर और विस्तृत चर्चा और विभिन्न पक्षों के बीच विचारों के आदान-प्रदान की जरूरत है।

पीठ ने कहा कि समिति द्वारा रखी गयी अंतरिम रिपोर्ट का जायजा लेने के बाद उसने पाया कि पौष मेला मैदान, जो निश्चित रूप से विश्व-भारती की संपत्ति है, को अक्षुण्ण बनाये रखने की गंभीर कोशिश के अलावा समिति ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया जो उस क्षेत्र के नागरिकों को उस मैदान को सार्थक और शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल करने पर कोई बुरा असर डालता हो।

साथ ही अदालत ने राज्य के महाधिवकक्ता किशोर दत्त की इस चार सदस्यीय समिति से इस्तीफ स्वीकार कर लिया और कहा कि यह तीन सदस्यीय समिति ही रहेगी।

यह समिति इस केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों के उपयुक्त समाधान के तौर-तरीके ढूंढने के लिए बनायी गयी थी। न्यायमूर्ति संजीब बनर्जी उसके अध्यक्ष है और न्यायमूर्ति अरजीत बनर्जी और केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल वाई जेड दस्तूर उसके अन्य सदस्य हैं।

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