कोलकाता, तीन सितंबर विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ को धुपगुड़ी विधानसभा क्षेत्र के आगामी उपचुनाव में महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इसके अहम घटक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस-मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) गठजोड़, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से उत्तर बंगाल की इस ग्रामीण सीट को छीनने के लिए एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं।
पांच सितंबर को होने वाला उपचुनाव तीनों राजनीतिक दलों के लिए परीक्षा की तरह है, जिसमें भाजपा को अपने वोट प्रतिशत में गिरावट को रोकने और सीट बरकरार रखने की उम्मीद है। वहीं, टीएमसी का लक्ष्य आदिवासी बहुल विधानसभा क्षेत्र पर कब्जा करना है और माकपा-कांग्रेस गठबंधन को अपनी पारंपरिक सीट दोबारा हासिल करने की उम्मीद है।
इस साल की शुरुआत में भाजपा विधायक बिशु पदा रे के निधन के बाद उपचुनाव जरूरी हो गया था। चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध जलपाईगुड़ी जिले की यह सीट कृषकों का क्षेत्र है, जहां राजबंशी और मतुआ समुदायों की काफी आबादी है, जिन्होंने 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को वोट दिया था। इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 15 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी भी है।
माकपा के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने धुपगुड़ी में एक विशाल रैली की, जिसमें दोनों नेताओं ने टीएमसी और भाजपा दोनों पर निशाना साधा, जबकि उनका केंद्रीय नेतृत्व 2024 के लोकसभा चुनावों में भगवा खेमे को हराने की रणनीति पर चर्चा के लिए ‘इंडिया’ की तीसरी बैठक में टीएमसी और अन्य भाजपा-विरोधी पार्टियों के साथ विचार-मंथन कर रहा था।
माकपा, कांग्रेस और टीएमसी ने इसे स्थानीय चुनाव करार देते हुए कहा कि इससे विपक्षी एकता के प्रयासों पर कोई असर नहीं पड़ा है। वहीं, भाजपा ‘इंडिया’ खेमे में मतभेद की ओर इशारा कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘‘यह एक स्थानीय चुनाव है और इसका विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ से कोई लेना-देना नहीं है। स्थानीय स्तर पर हम अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।’’
माकपा नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि बंगाल में लड़ाई सांप्रदायिक भाजपा और टीएमसी के कुशासन दोनों के खिलाफ है और धुपगुड़ी में लड़ाई, जो 1977-2011 तक वामपंथ का गढ़ रहा है, कोई अपवाद नहीं है।
माकपा ने पेशे से शिक्षक ईश्वर चंद्र रॉय को इस सीट से मैदान में उतारा है। टीएमसी, जिसने कई बार माकपा और कांग्रेस पर पश्चिम बंगाल में भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया था, ने ‘इंडिया’ गठबंधन में फूट के भाजपा के आरोपों को खारिज किया है।
टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने कहा, ‘‘धुपगुड़ी में जो कुछ हो रहा है, उसका राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के प्रयासों पर कोई असर नहीं पड़ा है। लेकिन यह सच है कि बंगाल में कई बार माकपा और कांग्रेस की भूमिका भाजपा की मदद करने वाली रही है। हम भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई में दृढ़ हैं।’’
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी इलाके में चुनाव अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। टीएमसी ने इस सीट से शिक्षक निर्मल चंद्र रॉय को मैदान में उतारा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि विपक्षी गुट के आगे बढ़ने से पहले ही इसमें दरारें दिख रही हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 45.65 फीसदी वोट हासिल कर यह सीट जीती थी, जबकि टीएमसी को 43.5 फीसदी वोट मिले थे। भाजपा ने इस बार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान की पत्नी तापसी रॉय को मैदान में उतारा है, जो कुछ साल पहले कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे।
भाजपा के अभियान का नेतृत्व कर रहे नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने लोगों से टीएमसी के कुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट करने की अपील की है।
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