नयी दिल्ली, 18 अप्रैल राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने 2014 के बाद ‘विकसित भारत’ की कल्पना की और इससे पहले इस बारे में सपना नहीं देखा था।
हरिवंश ने कहा कि देशवासी 2014 के बाद ‘‘भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों’’ के बारे में गर्व के साथ बात करने लगे हैं और यह एक ‘‘बड़ा बदलाव’’ है।
उन्होंने यहां इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में संस्कृति विषय पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषणों के संकलन ‘संस्कृति का पांचवां अध्याय’ के विमोचन के अवसर पर अपने संबोधन में ये बातें कहीं।
मोदी 2014 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री बने थे।
पुस्तक के रूप में संकलित इस संकलन में प्रधानमंत्री के 34 भाषण हैं, जिन्हें समयानुसार क्रमबद्ध किया गया है। इनकी शुरुआत दिल्ली के लाल किले में 2015 के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए भाषण से होती है और समापन अक्टूबर 2024 में वाराणसी में आर जे शंकर नेत्र चिकित्सालय के उद्घाटन के अवसर पर दिए गए भाषण से होता है।
राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि देश इस समय ‘आजादी का अमृत काल’ मना रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक ‘विकसित भारत’ बनाने का संकल्प प्रस्तुत किया है। ‘विकसित भारत’ की कल्पना 2014 के बाद की गई और यह सपना उससे पहले नहीं देखा गया था।’’
उपसभापति ने कहा कि ‘विकसित भारत’ के इस दृष्टिकोण में प्रधानमंत्री ने गुलामी की मानसिकता को त्यागने और अपनी संस्कृति पर गर्व करने के लिए कहा है और अपनी संस्कृति पर गर्व करने से जुड़ी समृद्ध सामग्री इस संकलन में है।
उन्होंने कहा, ‘‘2014 के बाद से हम भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के बारे में गर्व के साथ बात करने लगे हैं और ये एक बहुत बड़ा बदलाव है। इसलिए इस संकलन का महत्व और भी बढ़ गया है।’’
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