देश की खबरें | पाक के साथ जल विवाद : भारत ने कहा कि वह विश्व बैंक की नयी घोषणा का आकलन करेगा

नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर भारत ने बुधवार को कहा कि उसने किशनगंगा और रातले पनबिजली ऊर्जा परियोजना से जुड़े मामले में विश्व बैंक द्वारा तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थता न्यायालय की पीठ नियुक्त करने की घोषणा को देखा है और वह इस मामले का आकलन करेगा ।

भारत और पाकिस्तान के बीच दो परियोजनाओं को लेकर विवाद है जो 1960 के सिंधु जल संधि के तहत आता है।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘‘ हमने किशनगंगा और रातले पनबिजली ऊर्जा परियोजना से जुड़े मामले में समवर्ती रूप से स्वतंत्र विशेषज्ञ और न्यायधिकरण अदालत की एक पीठ नियुक्त करने की विश्व बैंक की घोषणा को देखा है।’’

विश्व बैंक ने 1960 की सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच असहमति और मतभेदों को देखते हुए किशनगंगा और रातले जलविद्युत संयंत्रों के संबंध में मध्यस्थता न्यायालय की पीठ और एक ‘तटस्थ विशेषज्ञ’ को नियुक्त किया है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘ विश्व की घोषणा में दो प्रक्रियाओं के साथ साथ होने के बुनियादी एवं कानूनी चुनौतियां होने की बात स्वीकार करने के मद्देनजर भारत इस मामले का आकलन करेगा । ’’

बयान में कहा गया है, ‘‘ भारत मानता है कि सिंधु जल संधि को अक्षरश: लागू किया जाना चाहिए।’’

भारत और पाकिस्तान ने नौ साल की वार्ता के बाद 1960 में संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस पर विश्व बैंक ने भी हस्ताक्षर किए थे। यह संधि नदियों के इस्तेमाल के संबंध में दोनों देशों के बीच सहयोग एवं सूचना के आदान-प्रदान का तंत्र स्थापित करती है।

बहरहाल, भारत और पाकिस्तान इस बात पर असहमत हैं कि क्या किशनगंगा और रातले जलविद्युत संयंत्रों के तकनीकी डिजाइन संबंधी विशेषताएं संधि का उल्लंघन करती हैं या नहीं।

सिंधु जल संधि के तहत पूर्वी नदियों-सतलुज, व्यास, रावी के पूरे जल का भारत बेरोक टोक इस्तेमाल कर सकता है और पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चेनाब का जल मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित किया गया है।

भारत को पश्चिमी नदियों पर संधि में तय मानदंडों के अनुसार सीमित भंडारण वाले संयंत्र बनाने की अनुमति है।

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