जयपुर, 17 मई जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री डॉ. महेश जोशी ने कहा है कि जल संरक्षण के प्रति कम उम्र से ही बच्चों में जागरूकता पैदा करने के लिए इस विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि पीएचईडी एवं भूजल विभाग द्वारा जल संरक्षण एवं जल के बेहतर प्रबंधन से संबंधित पाठ्य सामग्री तैयार कर स्कूल शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। जोशी बुधवार को यहां एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
जलदाय मंत्री ने कहा कि जल की बचत ही जल का उत्पादन है, जल है तो कल है, जल ही जीवन है यह साधारण स्लोगन नहीं बल्कि सारगर्भित कथन है। उन्होंने कहा कि इन्हें आमजन तक पहुंचाकर उन्हें भविष्य के लिए पानी बचाने की मुहिम में उनकी भागीदारी बढ़ानी होगी।
मंत्री ने कहा कि पानी की कीमत और उसका बेहतर प्रबंधन जैसलमेर एवं बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी इलाके की ढाणियों में रहने वाले ग्रामीणों से अधिक कोई नहीं जान सकता। उन्होंने कहा कि वहां बूंद-बूंद पानी को सहेजकर कम से कम पानी में गुजारा किया जाता है, जबकि शहरों में रहने वाले पढ़े-लिखे लोग पानी का उपयोग सही तरीके से नहीं कर पाते हैं।
उन्होंने कहा कि जितना बड़ा शहर होता है पानी की उतनी ही अधिक खपत होती है। उन्होंने कहा कि पानी का महत्व शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समझना होगा। जलदाय मंत्री ने कहा कि राज्य की विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बाद भी जल जीवन मिशन में राजस्थान ने बहुत सराहनीय कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि मिशन की प्रगति दर्शाने के लिए बनाए गए पैरामीटर हर राज्य की परिस्थितियों के अनुसार फिट नहीं हैं और यहां विषम परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान ने 40 लाख 68 हजार कनेक्शन कर लिए हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY