नयी दिल्ली, 28 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से कहा कि वह महाराष्ट्र में वधावन बंदरगाह के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर एक विशेषज्ञ टीम गठित करने पर विचार करे।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी द्वारा बंदरगाह को लेकर दायर उस वस्तु-स्थिति रिपोर्ट का अवलोकन किया, जिसमें कहा गया है कि फिलहाल कोई महत्वपूर्ण कार्य किए जाने की योजना नहीं है।
अदालत ने कहा, ‘‘अटॉर्नी जनरल ने वधावन बंदरगाह परियोजना की विस्तृत वस्तु-स्थिति रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखी है। विवरण से पता चलता है कि वर्तमान में केवल भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है और अक्टूबर 2025 तक भूमि का कब्जा मिलने की उम्मीद है। सड़क निर्माण कार्य अक्टूबर 2025 में शुरू होगा।’’
पीठ ने कहा, ‘‘हम दिए गए बयानों को रिकॉर्ड पर लेते हैं। हम यह स्पष्ट करते हैं कि भूमि अधिग्रहण इस विशेष अनुमति याचिका में पारित किए जाने वाले आगे के आदेशों के अधीन होगा। इसे देखते हुए, हम अंतरिम राहत प्रदान करने के अनुरोध पर विचार नहीं कर रहे हैं।’’
मामले पर छह मई को सुनवाई होगी।
उच्चतम न्यायालय ‘नेशनल फिशवर्कर्स फोरम’ और ‘कंजर्वेशन एक्शन ट्रस्ट’ की बम्बई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने वधावन में एक नये बंदरगाह के निर्माण के लिए दहाणू तालुका पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण द्वारा दिए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र को चुनौती दी थी।
दहाणू तालुका पर्यावरण संरक्षण प्राधिकरण ने 31 जुलाई, 2023 को जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण को बंदरगाह विकसित करने के लिए एनओसी प्रदान की थी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्र ने पिछले साल जून में महाराष्ट्र के वधावन में 76,200 करोड़ रुपये की लागत से सभी मौसमों में उपयोग में आने वाले बंदरगाह के निर्माण को मंजूरी दी थी।
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