उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से सर्वाधिक प्रभावित गरीब आदमी होता है और ‘‘प्रत्यक्ष लाभ अंतरण’’ योजना का लाभ इसके पात्र लाभार्थियों को मिलना जरूरी है और यह भ्रष्टाचार पर लगाम कसने से ही संभव हो पाया है। इसे राजनीतिक इच्छा शक्ति का परिणाम बताते हुए उन्होंने कहा ‘‘यह व्यवस्था बीते सात बरस के दौरान बन पाई है। ‘आईबीसी’ कोड आने के बाद तीन लाख करोड़ रुपये भारत सरकार के खाते में आए और दो लाख करोड़ रुपये अभी आने हैं। यह पैसा गरीबों का है।’’
सिन्हा ने कहा ‘‘संस्थाओं को स्थायित्व किसी व्यक्ति के लिए नहीं दिया जाता। यह संस्था के लिए दिया जाता है और सशर्त होता है। यह राष्ट्र के निर्माण के लिए होता है। इसमें पारदर्शिता होती है। इसमें कार्यापलिका और न्यायपालिका की भी भागीदारी होती है।’’
उन्होंने कहा कि 2012 में कुछ मामलों की जांच हुई। सीबीआई ने 264 मामलों की आंतरिक जांच की जिसमें पाया गया कि 698 आरोपी राजनीति से जुड़े हुए थे तथा 486 आरोपी अन्य लोग थे। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ऐसे मामलों पर लगाम लगाने में सहायक होगा।
इससे पहले संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने ‘‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन (संशोधन) विधेयक 2021’’ तथा ‘‘केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) विधेयक 2021’’ पर एक साथ चर्चा कराए जाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा ‘‘हम दोनों विधेयकों को साथ साथ ले सकते हैं और इन पर एक साथ चर्चा की जा सकती है।’’
कुछ सदस्यों ने इस पर विरोध जताया। इस पर उप सभापति हरिवंश ने दोनों विधेयकों पर अलग अलग चर्चा कराने का फैसला किया।
संसद के शीतकालीन सत्र से कुछ दिन पहले, सरकार ने पिछले माह सीबीआई के निदेशक और प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक का कार्यकाल बढ़ाने के लिए दो अध्यादेश जारी किए थे। ‘‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन (संशोधन) विधेयक 2021’’ तथा ‘‘केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) विधेयक 2021’’ इन दोनों अध्यादेशों के स्थान पर ही लाए गए हैं।
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