नयी दिल्ली, 29 जून जेल प्रशासन ने यहां दिल्ली उच्च न्यायालय को सोमवार को बताया कि 22 जून से सभी कैदियों ने लिये वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा शुरू की गई है जिससे वो अपने कानूनी सहायता वकीलों से संपर्क में रह सकें।
कोविड-19 महामारी की वजह से लागू बंद के मद्देनजर 25 मार्च से सभी विधिक परामर्श स्थगित कर दिया गया था।
दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम ने दिल्ली जेल प्रशासन की तरफ से पेश होते हुए मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ को बताया कि इसके अलावा तिहाड़ की जेल नंबर-6 में बंद महिला कैदियों के लिये 24 जून से वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा शुरू की गई है जिससे वो अपने निजी वकीलों से संपर्क कर सकेंगी।
सत्यकाम ने पीठ को यह भी बताया कि अगले 10-15 दिनों में राष्ट्रीय राजधानी की सभी जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये निजी वकील से संपर्क की सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी।
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उन्होंने कहा कि अभी जेल नंबर-6 में बंद कैदियों को छोड़कर अन्य कैदियों को सिर्फ फोन के जरिये निजी वकील से संपर्क करने की इजाजत दी जा रही है।
दो वकीलों अजीत पी सिंह और सार्थक मग्गो द्वारा दायर दो अलग-अलग जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से यह जानकारी दी गई। याचिकाओं में कैदियों को निजी वकीलों से विधिक परामर्श लेने की इजाजत जेल अधिकारियों द्वारा दिये जाने की मांग की गई है।
इस मामले में अगली सुनवाई सात जुलाई को होगी और तब तक जेल अधिकारियों द्वारा अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा को लेकर एक और स्थिति रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाएगी।
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