देश की खबरें | उत्तराखंड: उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को पिंडर, रिस्पना नदियों से मलबा हटाने के निर्देश दिए

नैनीताल, 24 मार्च उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को पिंडर और रिस्पना नदियों से मलबा हटाने और इन नदियों को मौसमी धाराओं से जोड़ने के आदेश देते हुए कहा कि यह भविष्य के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है।

उच्च न्यायालय ने प्राधिकारियों से इन नदियों और नालों से मलबा साफ करने की समय-सीमा बताते हुए एक हलफनामा दायर करने को कहा।

इन दोनों नदियों में मलबा डालने से संबंधित जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जी. नरेन्द्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने कहा कि अगर यह जारी रहा तो आने वाली पीढ़ियां हमें कोसेंगी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि नदियों और उनमें बहने वाली धाराओं में मलबा डालना बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि यह भविष्य में अस्तित्व का सवाल है।

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ये नदियां भूस्खलन को रोकने में मदद करती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर मलबा जमा होता रहा तो नदियां ये बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी, जिससे बाढ़, भू कटाव और भूस्खलन जैसी समस्याएं पैदा होंगी।

सुनवाई के दौरान देहरादून नगर आयुक्त नमामि बंसल व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहीं।

वन विभाग के प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, नगरीय विकास के सचिव नितेश झा और राजस्व सचिव सुरेंद्र नारायण पांडेय भी ‘वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग’ के जरिए सुनवाई में शामिल हुए।

अदालत ने सभी संबंधित सचिवों और नगर निकायों को निर्देश दिया कि वे अदालत के समक्ष एक हलफनामा दायर करें जिसमें यह बताया जाए कि ऐसी धाराओं और नदियों को साफ करने के निर्धारित समय सीमा क्या रहेगी।

उच्च न्यायालय ने डीजीपी को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित थाना प्रभारियों को नदियों और उनकी धाराओं में मलबा डालने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश जारी करें कि।

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