देश की खबरें | उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में मुख्य सचिव से जवाब मांगा

नैनीताल, 11 फरवरी उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दायर कर बताए कि लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है?

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की ।

सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि राज्यपाल के अनुरोध पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गयी है। सरकार ने अदालत से नियुक्ति के लिए कुछ और समय प्रदान करने की प्रार्थना की।

मामले में याचिकाकर्ता गोलापार निवासी रविशंकर जोशी ने जनहित याचिका में कहा है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है जबकि इस संस्थान पर हर साल दो से तीन करोड़ रुपये की अच्छी खासी रकम खर्च हो रही है।

याचिका में यह भी कहा गया कि कर्नाटक और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गयी है।

इसमें कहा गया कि हालांकि, लोकायुक्त के अभाव में उत्तराखंड भ्रष्टाचार से जूझ रहा है जिसकी वजह से हर छोटा मामला उच्च न्यायालय के समक्ष आ रहा है तथा अदालत में मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है।

जनहित याचिका के अनुसार, राज्य की सभी जांचकर्ता एजेंसियां सरकार के नियंत्रण में हैं और उसके राजनीतिक प्रभाव में हैं। किसी भी जांच एजेंसी को राजपत्रित अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करने का अधिकार नहीं है।

याचिका में कहा गया कि यहां तक कि सतर्कता विभाग भी राज्य पुलिस का हिस्सा है जो मुख्यमंत्री कार्यालय के नियंत्रण में है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उच्च न्यायालय ने पिछली तारीख में सरकार से लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंध में एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।

उन्होंने कहा कि अदालत के पूर्व के आदेश का पालन नहीं करने के लिए मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दायर किए जाने के बावजूद सरकार द्वारा अब तक अदालत में इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल नहीं की गयी है।

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