देहरादून, छह अप्रैल उत्तराखंड के देहरादून के मियांवाला क्षेत्र का नाम बदलकर रामजीवाला करने से उपजा विवाद अब थम गया क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक प्रतिनिधिमंडल को नाम यथावत रखने का आश्वासन दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक स्थानीय नेता ने रविवार को यह जानकारी दी।
भाजपा के स्थानीय नेता कुलदीप बुटोला के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने धामी से मुलाकात की थी, जिसमें यह आश्वासन दिया गया।
बुटोला ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने भरोसा दिलाया है कि मियांवाला के नाम में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और उन्होंने इस संबंध में संबंधित सचिव को निर्देश भी दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने 31 मार्च को मियांवाला सहित हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधमसिंह नगर जिलों में स्थित 15 विभिन्न स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की थी।
धामी ने कहा था कि इन स्थानों के नामों में परिवर्तन जनभावना और भारतीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप किया जा रहा है, जिससे लोग इनके संरक्षण में योगदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा ले सकें।
हालांकि नाम बदले जाने की घोषणा के बाद मियांवाला के स्थानीय लोगों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया।
स्थानीय लोगों का तर्क था कि राजपूतों के एक वर्ग को एक पदवी के तौर पर ‘मियां’ उपाधि दी गयी थी और उसका किसी धर्म विशेष से कोई संबंध नहीं है।
वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल गुसांई ने इस बारे में कहा कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की गुलेर रियासत के लोगों को टिहरी के महाराजा प्रदीप शाह ने ‘मियां’ उपाधि दी थी।
उन्होंने बताया कि बाद में महाराजा ने इन लोगों को देहरादून में एक जागीर भेंट की, जिसे मियांवाला के नाम से जाना गया।
गुसांई ने बताया कि गुलेर रियासत महाराजा प्रदीप शाह की ससुराल थी।
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