West Bengal Govt Decision: पश्चिम बंगाल में नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य की सामाजिक और आर्थिक नीतियों में व्यापक बदलाव करने का निर्णय लिया है. कैबिनेट की हालिया बैठक में सरकार ने पिछली सरकार द्वारा दिए जा रहे धर्म-आधारित मासिक भत्तों को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा की है. इसके साथ ही, महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक नई वित्तीय सहायता योजना को मंजूरी दी गई है. सरकार के ये सभी बड़े फैसले 1 जून, 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू होंगे.
धर्म-आधारित भत्तों पर पूरी तरह रोक
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने धार्मिक आधार पर दी जाने वाली सभी वित्तीय सहायता योजनाओं को बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इस फैसले से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार द्वारा 2012 में शुरू की गई इमामों और मुअज्जिनों की मासिक भत्ता योजना और 2020 में पुजारियों के लिए शुरू किया गया मानदेय समाप्त हो जाएगा. यह भी पढ़े: Who Is Makhanlal Sarkar? पश्चिम बंगाल में नई सरकार का आगाज, PM मोदी ने 98 वर्षीय दिग्गज नेता माखनलाल सरकार के पैर छूकर लिया आशीर्वाद, जानें उनके बारे में; VIDEO
पुरानी व्यवस्था के तहत इमामों को 3,000 रुपये, मुअज्जिनों को 1,500 रुपये और पुजारियों को 2,000 रुपये मासिक मिलते थे. सरकार का यह कदम भाजपा के उस चुनावी घोषणा पत्र के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें तुष्टिकरण की राजनीति को खत्म करने का वादा किया गया था.
'लक्ष्मी भंडार' की जगह शुरू होगी 'अन्नपूर्णा योजना'
एक अन्य बड़े फैसले में, राज्य सरकार ने महिलाओं के आर्थिक उत्थान के लिए 'अन्नपूर्णा योजना' (जिसे अन्नपूर्णा भंडार योजना या मातृशक्ति भरोसा कार्ड योजना भी कहा जा रहा है) को हरी झंडी दे दी है. इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1 जून, 2026 से हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी.
महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग द्वारा अधिसूचित यह नई योजना पिछली 'लक्ष्मी भंडार योजना' का स्थान लेगी. सरकार का उद्देश्य महिलाओं को घरेलू खर्चों, दैनिक आवश्यकताओं और बच्चों की शिक्षा के लिए आत्मनिर्भर बनाना है. इसके सुचारू संचालन के लिए लाभार्थियों के बैंक खातों का वैध पहचान दस्तावेजों से लिंक होना अनिवार्य होगा.
सरकारी बसों में मुफ्त सफर
शुभेंदु अधिकारी कैबिनेट ने राज्य के नागरिकों और कर्मचारियों के लिए भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं:
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मुफ्त बस यात्रा: राज्य की महिलाओं के लिए सरकारी बसों में यात्रा पूरी तरह मुफ्त करने की सुविधा शुरू की जाएगी.
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सातवां राज्य वेतन आयोग: राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए सातवें राज्य वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है, जिससे कर्मचारियों के वेतनमान में सुधार होगा.
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जांच पैनल का गठन: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो अलग-अलग विशेष पैनल गठित करने का निर्णय लिया गया है.
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OBC सूची पर कार्रवाई: कलकत्ता उच्च न्यायालय के पिछले आदेशों के अनुपालन में राज्य की मौजूदा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची को रद्द कर दिया गया है. अब आरक्षण की नई पात्रता तय करने के लिए एक विशेष जांच समिति बनाई जाएगी.
पश्चिम बंगाल में सरकार के ये फैसले राज्य की राजनीति और सामाजिक संरचना में एक बड़े बदलाव का संकेत देते हैं. एक तरफ जहां धर्म-आधारित भत्तों को समाप्त कर विकास के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को मजबूत करने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के लिए बड़ी वित्तीय सहायता योजना लागू कर जमीनी स्तर पर पकड़ बनाने की कोशिश की गई है. आने वाले समय में इन दूरगामी फैसलों के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर रहेगी.












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