यह कदम तब उठाया गया है जब एक महीने पहले विदेश मंत्री माईक पोम्पियो ने सुरक्षा परिषद को बताया कि ईरान ज्वायंट कंप्रीहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन या जेसीपीओए (2015 के ईरान परमाणु करार) के तहत अपने दायित्वों का पालन नहीं कर रहा है।
उन्होंने स्थानीय समयानुसार शाम आठ बजे एक बयान में कहा, ‘‘ अमेरिका ने यह कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि ईरान के जेसीपीओए दायित्वों का पालन करने में विफल रहने के साथ ही सुरक्षा परिषद भी ईरान पर हथियार पाबंदियों का विस्तार करने में विफल रही जो उस पर 13 सालों से थी।
उन्होंने कहा, ‘‘ अपने अधिकारों के तहत हमने हथियार पाबंदी समेत संयुक्त राष्ट्र के हटा लिये गये प्रतिबंधों को बहाल करने की अपनी स्नैपबैक (एक प्रकार की कानूनी) प्रक्रिया शुरु की है। फलस्वरूप दुनिया सुरक्षित रहेगी।’’
लेकिन अमेरिका के इस कदम का सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों देशों ने जबर्दस्त विरोध किया है और उन्होंने उसको नजरअंदाज करने की ठानी है। उनका कहना है कि अमेरिका इसका कानूनी हक गवां चुका है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2018 में इस परमाणु करार से हट गये और ईरान पर अमेरिकी पाबंदियां लगा दी।
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स्नैपबैक का तात्पर्य है कि परमाणु करार के तहत दी गयी ढील या हटा ली गयी पाबंदियों को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा दोबारा लगाया जा सकता है।
एपी
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