कोलकाता, 10 मार्च पश्चिम बंगाल विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक का माइक बंद करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ विपक्षी दल ने जमकर विरोध किया।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने भाजपा विधायक दीपक बर्मन को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया और मार्शल को भाजपा के दो अन्य विधायक शंकर घोष और मनोज उरांव को सदन से बाहर भेजने का निर्देश दिया।
इस कार्रवाई के विरोध में भाजपा विधायकों ने विधानसभा से बर्हिगमन किया और विधानसभा अध्यक्ष पर ‘‘पक्षपातपूर्ण रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया।
यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब भाजपा विधायक हिरन चटर्जी सवाल कर रहे थे कि लोक सेवा आयोग को अपनी जिम्मेदारियां निभाने से क्यों रोका जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष ने अपने अधिकार याद दिलाते हुए भाजपा विधायक के भाषण को सीमित करने की कोशिश की, लेकिन चटर्जी ने बोलना जारी रखा। इसके बाद बनर्जी ने उनका माइक बंद कर दिया जिससे भाजपा विधायक आक्रोशित हो गए और उन्होंने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश बताया।
विरोध में शंकर घोष और मनोज उरांव ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। विधानसभा अध्यक्ष की बार-बार चेतावनी के बावजूद जब हंगामा नहीं रुका तो मार्शल को बुलाकर दोनों विधायकों को बाहर भेज दिया।
इस कार्रवाई के बाद भाजपा विधायकों ने बर्हिगमन कर दिया और असंतोष जाहिर करते हुए कागज फाड़कर फेंक दिए।
बाद में, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की निंदा करते हुए इसे ‘‘गुंडागर्दी’’ करार दिया और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मार्शल ने सतारुढ़ तृणमूल के प्रभाव में आकर यह कार्रवाई की।
हालांकि, तृणमूल विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले का बचाव किया और कहा कि भाजपा ‘‘विधानसभा की कार्यवाही बाधित’’ करने की कोशिश कर रही थी।
उन्होंने कहा कि सदन में अनुशासन बनाए रखने के लिए विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई आवश्यक थी।
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