प्रयागराज, 16 मई बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने धन की अनियमितता और अधिकारों एवं पद के दुरुपयोग के आरोप में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष हरि शंकर सिंह को शुक्रवार को निलंबित कर दिया।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को निलंबन का आदेश पारित किया जिसमें कहा गया है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष हरि शंकर सिंह को तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष के तौर पर कार्य करने से रोका जाता है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष देवेंद्र मिश्र नगरहा, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कार्यालय का प्रभार संभालेंगे और अध्यक्ष के दायित्वों का निर्वहन करेंगे। वहीं हरि शंकर सिंह द्वारा 14 मार्च, 2020 के बाद पारित सभी आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हरि शंकर सिंह को यह बताने का निर्देश दिया है कि किन परिस्थितियों में उन्होंने एक अनाधिकृत लिपिक के साथ एक अलग संयुक्त बैंक खाता खोला और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से बगैर अधिकार प्राप्त किए नामांकन शुल्क के तौर पर एकत्र की गई रकम उस खाते में डाली।
हरि शंकर सिंह से यह स्पष्टीकरण भी मांगा गया है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से अधिकार प्राप्त किए बगैंर उन्होंने कैसे और क्यों रामजीत सिंह को बहाल करने का अवैध आदेश पारित किया, जबकि उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने रामजीत सिंह के खिलाफ जांच रिपोर्ट पेश की थी जिसमें 72 लाख रुपये के गबन का आरोप सिद्ध हुआ था।
उल्लेखनीय है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के कई सदस्यों ने हरि शंकर सिंह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया से उन्हें हटाने की मांग की थी। सिंह पर यह भी आरोप है कि काफी पहले अनियमितता के लिए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव पद से निलंबित किए गए रामजीत सिंह को हरि शंकर सिंह ने 15 मई, 2020 को बहाल कर दिया।
आपात बैठक बुलाने के आठ सदस्यों की मांग के बाद भी हरि शंकर सिंह इस मामले को लटकाने का प्रयास करते रहे और बैठक आहूत करने से अवैध रूप से इनकार कर दिया।
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