नयी दिल्ली, 30 जून उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने के लिये बनाई गई समिति ने अपना कार्य पूरा कर लिया है और ‘‘जल्द’’ ही प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा।
इस मुद्दे पर तीखी बहस के बीच कांग्रेस नेता मीम अफजल ने इसे ‘‘डीसीसी-डिवाइडिंग सिविल कोड’’ करार दिया लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे लागू करने पर आपत्ति जताने वाले विपक्षी दलों के रवैये की निंदा की।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यूसीसी कोई धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए समान अधिकार, न्याय और गरिमा का मामला है। उन्होंने इस पर आपत्ति जता रहे विपक्षी दलों के रवैये की निंदा की।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा यूसीसी को लेकर उठाए जा रहे कदम के पीछे ‘चुनावी एजेंडा’ है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में उठाए गए कदम को वापस लेने की भी अपील की।
इससे पहले न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई ने शुक्रवार को कहा कि उत्तराखंड के लिए प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मसौदा तैयार हो गया है और इसे जल्द ही राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा।
उत्तराखंड सरकार ने पिछले साल विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी। इस समिति की प्रमुख देसाई ने कहा कि समिति ने सभी प्रकार की राय और चुनिंदा देशों के वैधानिक ढांचे सहित विभिन्न विधानों एवं असंहिताबद्ध कानूनों को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया है।
धामी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘प्रदेशवासियों से किए गए वादे के अनुरूप समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिये बनाई गई समिति ने आज 30 जून को अपना कार्य पूरा कर लिया और जल्द ही देवभूमि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।’’
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता अफजल ने कहा, ‘‘यह यूसीसी नहीं है, यह डीसीसी-डिवाइडिंग सिविल कोड है। यूसीसी एजेंडा नहीं है, बल्कि एजेंडा देश के लोगों को बांटना है।’’
पार्टी के रूख से अलग जाते हुए हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने समान नागरिक संहिता के लिए अपना "पूर्ण समर्थन" दिया और इसका "राजनीतिकरण" नहीं किये जाने का आग्रह किया।
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण एवं खेल मंत्री ने सवाल किया कि लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।
सिंह हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रमुख प्रतिभा सिंह के बेटे हैं। उनके दिवंगत पिता वीरभद्र सिंह छह बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे।
कांग्रेस नेता ने फेसबुक पर कहा, ‘‘मैं समान नागरिक संहिता का पूरा समर्थन करता हूं जो भारत की एकता और अखंडता के लिए जरूरी है, लेकिन इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।’’
हालांकि उन्होंने सवाल किया कि केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पहले ऐसा कानून क्यों नहीं लागू किया, जबकि पिछले नौ साल से उसकी पूर्ण बहुमत की सरकार है। उन्होंने पूछा, ‘‘चुनाव से कुछ महीने पहले ही यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।’’
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता विजयन ने एक बयान में कहा कि केंद्र के कदम को ‘‘देश की बहु सांस्कृतिक विविधता को मिटाकर केवल बहुमत के सांप्रदायिक एजेंडे ‘एक देश, एक संस्कृति’ को लागू करने की योजना’ के तौर पर देखा जा सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार और विधि आयोग को समान नागरिक संहिता के संदर्भ में उठाए गए कदमों को वापस ले लेना चाहिए।’’
भाजपा नेता जावड़ेकर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लागू करने पर आपत्ति जताने वाले विपक्षी दलों के रवैये की निंदा की।
तिरुवनंतपुरम में प्रदेश पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम बहुल देश समान नागरिक संहिता का पालन कर रहे हैं।
उन्होंने रेखांकित किया कि इंडोनेशिया, सूडान, तुर्की, बांग्लादेश और कई अन्य देशों में समान नागरिक संहिता है तथा भारत के गोवा और पुडुचेरी में यह पहले से ही लागू है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यूसीसी को लेकर दुष्प्रचार कर रही है।
यादव ने इटावा में पत्रकारों से बातचीत में भाजपा पर जमकर निशाना साधा।
यूसीसी को लेकर भाजपा के रुख पर जब उनसे सवाल किया गया तो यादव ने कहा, ‘‘जब भी चुनाव आते हैं, ये (भाजपा) लोग इस तरह का प्रचार करते हैं। उन्हें न तो कुछ करना है और न ही वे कुछ कर पाएंगे। वे चुनाव से पहले इस तरह की बातें करते रहेंगे।’’
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना ने शुक्रवार को कहा कि वह ‘एक देश, एक कानून’ के बालासाहेब ठाकरे के दृष्टिकोण का समर्थन करती है और उसने केन्द्र सरकार से संसद के मानसून सत्र में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता पर चर्चा कराने को कहा।
एकनाथ शिंदे-देवेन्द्र फडणवीस नीत महाराष्ट्र सरकार का एक साल पूरा होने पर मुंबई में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवसेना नेता एवं दक्षिण-मध्य मुंबई सीट से सांसद राहुल शेवाले ने समान नागरिक संहिता के प्रति पार्टी का पूर्ण समर्थन दोहराया।
इस बीच, एक संसदीय स्थायी समिति ने एक विधि समिति द्वारा हाल में जारी एक नोटिस पर विधि आयोग और कानून मंत्रालय के प्रतिनिधियों को तीन जुलाई को बुलाया है और इस मुद्दे पर हितधारकों के विचार मांगे हैं।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने शुक्रवार को दावा किया कि "समान नागरिक संहिता अपने मौजूदा स्वरूप में" भारत के विचार के खिलाफ है।
शिलांग में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के प्रमुख ने कहा कि विविधता भारत की ताकत है।
उन्होंने कहा, ‘‘एनपीपी को लगता है कि यूसीसी भारत के एक विविध राष्ट्र होने के विचार के खिलाफ जायेगी, जिसमें विविधता हमारी ताकत और पहचान है।"
उन्होंने हालांकि कहा कि यूसीसी मसौदे की वास्तविक सामग्री को देखे बिना इस संबंध में विवरण में जाना मुश्किल होगा।
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